भोपाल: फैज मस्जिद में वुजू के लिए लगाए नई तकनीक के नल, हर माह बचा रहे सवा दो लाख लीटर पानी

मध्य प्रदेश: देशभर के कई राज्यों में भूजल स्तर में लगातार गिरावट को देखते हुए नवाबों के शहर भोपाल में मुस्लिम संगठनों ने पानी बचाने के लिए मस्जिदों से एक नायाब मुहिम की शुरुआत की है। पानी बचाने की मुहिम को और अधिक कारगर बनाने की दिशा में अब शहर की मस्जिदों में भी प्रयास शुरू हो गए हैं। जिसमे नमाज के लिए किए जाने वाले वुजू के दौरान भी उतना ही पानी खर्च होगा जितनी आपको जरूरत है। वुजू के दौरान जो पानी व्यर्थ बह जाता है, उसे रोकने के लिए भोपाल की मस्जिदों में नई तकनीक वाले नल लगाए जा रहे हैं। जो बिना किसी सेंसर के काम करेंगे।

नई तकनीक वाले नल जिनमें लगी राड को टच करने पर ही यह चलेंगे। और जैसे ही इसे आप छोड़ देंगे ये अपने आप बंद हो जाएंगे। इस नल में एक छोटी जायस्टिक का इस्तेमाल किया गया है, जो किसी धुरी पर घूमने वाली एक छड़ से बना होता है। इस छड़ को पुश करने पर यह चलने लगता है और जैसे ही आप इससे हाथ हटाएंगए यह बंद हो जाता है।

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भोपाल एयरपोर्ट रोड इंद्रविहार कॉलोनी स्थित फैज मस्जिद से ऐसे ही नल लगाए गए है। जिसका रिजल्ट काफी अच्छा मिला है नतीजा यह है कि जहां वुजू के लिए रोज दो से ढाई टैंकर पानी खर्च हो रहा था, वहीं अब केवल एक ही टैंकर से काम हो जाता है। एक टैंकर में करीब 5 हजार लीटर पानी रहता है, इस हिसाब से रोज करीब 12 हजार 500 लीटर पानी लगता था। इस स्कीम से अब रोज सिर्फ एक टैंकर यानि 5000 हजार ली पानी ही लग रहा है।

मध्यप्रदेश वक़्फ़ बोर्ड के चेयरमैन शौकत मोहम्मद ख़ान ने कहा कि उन्होंने कई मस्जिदों में लोटे रखे जाने का अभियान भी शुरु कर दिया है और शीघ्र ही अन्य मस्जिदों में भी जन सहयोग से ऐसा करने की अपील की जायेगा. खान ने बताया कि पानी बचाने का पैगाम मोहम्मद साहब ने भी 1400 साल पहले दिया था. उन्होंने कहा था कि अगर वजू दरिया के किनारे भी किया जा रहा है, तो वहां भी पानी को किफायत से खर्च किया जाना चाहिए. मोहम्मद साहब की इस बात का हदीस में भी उल्लेख है।

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अब इस नई तकनीक से हर महीने सवा दो लाख लीटर पानी की बचत होने लगी है। आपको बता दें शहर में मस्जिदों की संख्या 800 से भी अधिक है।मसाजिद कमेटी की जानिब से हाल ही में आयोजित एक जलसे में मुहिम में शामिल लोगों ने पानी बचाने पर जोर देने के साथ ही कई तरह के उपाय भी बताए। जलसे में मुंबई के उद्योगपति फैसल हवा ने बताया कि उन्होंने व उनके भाई जावेद खान ने एक इस नल का डिजाइन बनाकर एक कंपनी से तैयार करवाया है।

पूर्व वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी उमर फारुख खट्टानी को पानी बचाने की इस मुहिम का प्रभारी बनाया गया है। और उन्होंने बताया कि एयरपोर्ट रोड स्थित फैज मस्जिद में पुराने नलों की जगह नए नलों को लगाया गया है। नतीजा यह हुआ कि इस मस्जिद में जहां हर रोज दो से ढाई टैंकर पानी की जरूरत होती थी, वहां अब केवल एक टैंकर पानी ही खर्च हो रहा है। 5 वक्त की नमाज में यहां करीब एक हजार नमाजी हर रोज आते हैं।

उन्होंने बताया कि तीन अन्य मस्जिदों में भी ये नल लगाए जा चुके हैं। उद्देश्य यह है कि अक्सर लोग मुंह-हाथ धोते समय नल खुला छोड़ देते हैं और ऐसे में काफी पानी व्यर्थ बह जाता है। इसे रोकने के लिए ही इस तरह के नल लगाए गए हैं, जिनमें टोंंटी की जगह केवल एक पतली नली है, जिससे पानी भी पतली धार ही निकलती है।

खान ने इस मुहिम को नाम दिया गया है पानी बचाओ नेकी कमाओ। मजहबी किताबों में भी उल्लेख है कि वुजू के दौरान भी पानी फालतू जाया न हो। मसाजिद कमेटी के यासिर अराफात ने बताया कि कई बड़ी मस्जिदों की कमेटियों से भी चर्चा चल रही है। इसके बाद वहां भी इन नलों को लगाया जाएगा।