न्यूजीलैंड में शाहिद हुए ज्यादातर मुसलमानों का रिश्ता भारत से क्यों

न्यूजीलैंड के क्राइस्टचर्च शहर की दो मस्जिदों पर 15 मार्च 2019 की सुबह करीब 10 बजे (भारत के समयनुसार) आतंक’वादी हमला हुआ. भारतीय राजनयिक की जानकारी के अनुसार अंधाधुंध की गई फायरिंग में 49 लोगों की मौ’त हो गई जबकि 27 से ज्यादा लोग जख्मी और 9 भारतीय लापता हो गए हैं. हम’लावर की पहचान 28 वर्षीय ब्रेंटन टैरंट के तौर पर हुई. आ’तंकी ने कैमरा लगाकर गोलियां चलाई और फेसबुक पर लाइवस्ट्रीमिंग की थी. इस मामले में पुलिस ने कुल 4 लोगों को गिरफ्तार किया. आरोपियों में एक महिला भी शामिल है.

बताया जा रहा है कि बांग्लादेशी खिलाड़ी भी हमलावर के निशाने पर थे जो उस समय नमाज़ अदा करने के लिए मस्जिद में थे. गोलीबारी के समय बांग्लादेश की क्रिकेट टीम क्राइस्‍टचर्च की अल नूर मस्जिद में मौजूद थी. टीम सुरक्षित निकल लिया गया था. हमले में मा’रे गए ज्यादातर मुसलमानों का रिश्ता भारत से क्यो था चलिए जानते है.

Image Source: Google

न्यूजीलैंड, प्रशांत महासागर के दक्षिण-पश्चिमी हिस्से में स्थित है. 2013 की जनगणना के अनुसार देश की कुल आबादी 47.9 लाख है. इसमें से 1.18% फीसदी लोग इस्लाम धर्म को मानने वाले हैं. यहां पर मुसलमान 1990 के शुरुआती सालों से लेकर 1960 के बीच आकर बसे है.

1990 से 1960 के दौर में आप्रवासी मुसलमान दक्षिण एशिया और पूर्वी यूरोप से आए और यहां बसे थे. यहां 1970 के दशक में फिजी इंडियंस के साथ बड़े पैमाने पर मुस्लिम आए. 1990 के दशक में बहुत से युद्धग्रस्त देशों के शरणार्थी भी यहां आए.

Image Source: Google

न्यूजीलैंड में पहला इस्लामी केंद्र 1959 में खुला था. फ़िलहाल यहां कई मस्जिदें और दो इस्लामिक स्कूल हैं. यहां के मुसलमानों में ज्यादातर सुन्नी हैं और अल्पसंख्यकों में शिया और कुछ अहमदी मुसलमान गिने जाते है. इन्हीं मुसलमानों के द्वारा ही यहां मस्जिदें चलाई जाती हैं.

1951 में एसएस गोया नाम की शरणार्थी नाव से पूर्वी यूरोप से 60 से ज्यादा मुस्लिम पुरुष आए. इसी नाव से मज़हर कर्सनिकी भी जो में न्यूजीलैंड मुस्लिम एसोसिएशन के अध्यक्ष भी बने. इन्हीं गुजराती और यूरोपीय प्रवासियों ने 1950 में साथ काम करना शूरू किया और एक घर खरीदा, जिसे 1959 में इस्लामिक केंद्र बना दिया गया.

Image Source: Google

कुछ साल बाद यहां मौलाना सईद मूसा पटेल नाम का पहला इमाम आया जो गुजरात से थे. अप्रेल 1979 में मज़हर कर्सनिकी ने तीन मुस्लिम ऑर्गनाइज़ेशन को मिलाकर एक नेशनल बॉडी बनाया जिसे फेडरेशन ऑफ इस्लामिक एसोसिएशन्स ऑफ न्यूज़ीलैंड नाम दिया गया. मज़हर अपने प्रयासों के लिए 2002 में न्यूजीलैंड सरकार से सम्मानित भी किये गए.

क्राइस्टचर्च की अल-नूर मस्जिद के हम’ले में भारतीय मूल का एक व्यक्ति घायल हुआ. जिसका नाम मोहम्मद शमीम था जो झारखंड के जमशेदपुर के बारीनगर का था. उसे बाएं कंधे में गोली लगी थी. शमीम टेल्को के बारीनगर में रहते थे और टाटा मोटर्स में काम करते थे.