IS के नए मॉड्यूल का खुलासा, NIA ने अमरोहा से 5 मुसलमान किए गिरफ्तार, नया ट्रेंड आ रहा नजर

नई दिल्ली: राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने इस्लामिक स्टेट के हरकत-उल-हर्ब-ए-इस्लाम’ के संबंध में दिल्ली और उत्तर प्रदेश में 16 से ज्यादा जगहों पर छापे मारे. फिलहाल इस बारे में ज्यादा जानकारी सामने नहीं आई है. उत्तर प्रदेश एटीएस ने एनआईए के साथ साझा ऑपरेशन की पुष्टि की है. इस मामले में कश्मीर में सक्रिय जाकिर मूसा का भी नाम आया है।

इस ऑपरेशन में अमरोहा से पांच लोगों को गिरफ्तार किया गया है. जानकारी के मुताबिक एनआईए और एटीएस की ज्वाइंट टीम ने अमरोहा के सैदपुर इम्मा गांव में एक ठिकानें पर छापेमारी की. इसके साथ ही ये भी जानकारी सामने आई है कि एनआईए शाम 4 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इस छापेमारी का ब्योरा साझा कर सकती है।

एक अधिकारी ने ज्यादा जानकारी देने से इनकार करते हुए कहा कि विभिन्न जगहों पर तलाशी सुबह शुरू हुई और अभी भी जारी है. बता दें कुछ दिन पहले ही केंद्रीय गृह मंत्रालय ने आतंकी संगठन आईएसआईएस के पैर पसारने को लेकर अलर्ट जारी किया. पुलिस लंबे समय से इस मॉड्यूल के पीछे काम कर रही थी.

बुधवार को हुई गिरफ्तारी बताती है कि इनसे देश को किस कदर खतरा है। एनआईए के सूत्र बताते हैं कि दिल्ली में जन्मे मौलवी मुफ्ती मो. सुहैल जिसका कोड नेम हजरत है, वह अमरोहा में मस्जिद के जरिए युवाओं को जिहाद के लिए बरगला रहा था।

इससे पहले 17 मार्च 2017 को भोपाल-उज्जैन बस में धमाके की घटना के बाद कोई बड़ी घटना नजर नहीं आई थी। इस बार मामला अलग था। इंटरनेट रिसर्च का सहारा लिया गया और बताया जा रहा है कि इन आतंकियों ने 25 किलो पोटेशियम नाइट्रेट जमा कर लिया था। इनके कब्जे से 12 पिस्टल, 150 राउंड गोलियां और छोटे रॉकेट लॉन्चर भी मिले।

पहली बार आईएस के पास से इतने घातक हथियार मिले हैं। हालांकि तेलंगाना पुलिस ने कुछ समय पहले ही आईएस के अपनी तरह के नए किस्म के मॉड्यूल का खुलासा किया था। लेकिन नए साल पर साजिश का ये प्लान कुछ अलग ही दिख रहा है।

मो. सुहैल भले ही एक मौलवी हो लेकिन उसका सहयोगी साकिब इफ्तेखार ऐसा नहीं था। दिल्ली निवासी अनस यूनुस ने बम के लिए इलेक्ट्रानिक सामान खरीदा था। उसने नोएडा के एस विश्विद्यालय से सिविल इंजीयनियरिंग की है। जुबैर मलिक जिसने कथित रूप से सिम कार्ड खरीते वह भी नई दिल्ली यूनिवर्सिटी में पढ़ता है। उसका भाई जायद मलिक पर भी सिम खरीदने का आरोप है और वह भी यूनिवर्सिटी में पढ़ चुका है।

अच्छे परिवारों से है युवा

सरकारी आंकडे़ बताते हैं कि आएस की विचारधारा से ऐसे लोग जुड़ रहे हैं जो अच्छे परिवारों से हैं। 68 फीसदी आरोपी मिडिल क्लास परिवारों से हैं और उनके पास डिग्री है। तीन महीने पहले ही अल कायदा से जुड़ा तौफीक नाम का शख्स मुठभेड़ में मारा गया था। उसका पिता एटोमिक एनर्जी हैवी वाटर प्लांट मनुगुरू में काम करता था। तौफीका का कभी भी किसी इस्लामिक राजनेता से संपर्क नहीं था।

इसी तरह 2016 में अमान टंडेल नाम के युवक का वीडियो दिखा जिसमें वह हाथ में तलवार लिए बाबरी मस्जिद को ढहाए जाने, मुजफ्फरनगर, गुजरात दंगों का बदला लेने की बात कह रहा था। ये युवा बाबरी की घटना के बाद ही पैदा हुए थे। इनमें बदले की भावना एक नए ट्रेंड को जन्म दे रही है।