निजामुद्दीन मरकज मामले अब मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने दिया बड़ा बयान

निजामुद्दीन के मरकज़ में तब्लीगी जमात कार्यक्रम में भाग लेने वाले कई लोगों ने कोरोनोवायरस के लिए सकारात्मक परीक्षण किया है। जमात के कार्यक्रम में लगभग दो हजार लोगों के इकट्ठे होने को कोरोना संक्रमण के लिहाज से एक बड़ी चूक माना जा रहा है। वही इस कार्यक्रम में शामिल सात लोगों की मौ’त हो गई है जबकि कई लोगों को क्वारंटीन किया जा रहा है।

मरकज़ में तब्लीगी जमात कार्यक्रम को लेकर पुलिस ने सात लोगों पर मामला दर्ज किया है। लेकिन इस घटना की मीडिया में जिस तरह की रिपोर्टिंग की जा रही है, उसे लेकर कुछ मुसलमान धार्मिक नेताओं में रोष है। उन्होंने मीडिया पर कई तरह के सवाल उठाए है।

आपको बता दें तब्लीगी जमात दुनिया भर की जड़ों वाला एक धार्मिक संगठन है। घटना के समय जो कुछ हुआ वह दुर्भाग्यपूर्ण था और जिन्हें जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए। हम उन लोगों से भी आग्रह करते है जिन्होंने स्थानीय अधिकारियों को अपनी जानकारी देने के लिए इस आयोजन में भाग लिया था।

इससे पहले देश के प्रमुख मुस्लिम संगठनों ने बड़ी तादाद में कोविड-19 संक्रमण के लिये दिल्ली के हजरत निजामुद्दीन मरकज पर दोषारोपण किये जाने पर कहा है कि मामले की जांच के बाद ही किसी नतीजे पर पहुंचा जाना चाहिये।

वही अमर उजाला की खबर के अनुसार, देश में मुसलमानों के सबसे बड़े संगठन आल इण्डिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के महासचिव मौलाना वली रहमानी ने मंगलवार को इस मुद्दे पर बातचीत में कहा कि मरकज जैसे धार्मिक केन्द्रों में लोगों का आना जाना लगा रहता है।

उन्होंने कहा की यह जांच का विषय है कि गलती किसकी है लेकिन उससे पहले ही निजामुद्दीन के मरकज को कुसूरवार ठहराना सही नहीं होगा। उन्होंने कहा कि ऐसा कहा जा रहा है कि मरकज कोरोना का केन्द्र है।

इस दौरान उन्होंने कहा की अगर निजामुद्दीन मरकज से ही कोरोना फैला है तो हिन्दुस्तान में अब तक जो 34 लोग जो इस संक्रमण से मरे हैं। क्या वे मरकज में रहकर आये थे?

जब निजामुद्दीन मरकज ने प्रशासन को स्थिति के बारे में बता दिया था और बार बार उसे याद भी दिलाया तो उसके मोहतमिम पर मुकदमा चलाने की बात कहां तक दुरुस्त है? इस बीच, देश में शिया मुसलमानों के प्रमुख संगठन आल इण्डिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड का भी कहना है कि बिना जांच किये किसी को भी कुसूरवार ठहराना सही नहीं है।

वही बोर्ड के प्रवक्ता मौलाना यासूब अब्बास ने कहा कि मरकज का प्रबन्धन लॉकडाउन के बाद वहां पैदा हुई सूरतेहाल के बारे में प्रशासन को जानकारी देने की बात कह रहा है।

जबकि प्रशासन इससे इनकार कर रहा है. यह जांच का विषय है. बिना जांच किये किसी को भी दोषी नहीं ठहराना चाहिये। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि मरकज को यह मामला इतने हल्के में नहीं लेना चाहिये था।