मजहब-ए-इस्लाम का मजाक बनाने वाली नुसरत जहां को पड़ा भा’री

नई दिल्लीः बंगाली अभिनेत्री और ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस टीएमसी सांसद नुसरत जहां एक बार फिर सुर्खियों में है। दरअसल कोलकाता में इस्कॉन रथयात्रा के दौरान आरती को लेकर बरेलवी मसलक के उलेमा के निशान पर आ गई हैं। उलेमा ने नुसरत जहां के इस किरदार को सियासी रूप दिया है। उलेमा ने कहा है कि मजहबे इस्लाम के दायरे को जो भी पार करता है वो इस्लाम से खारिज हो जाता है। नुसरत जहां ने ऐसी गुस्ताखी की है इसलिए वो फिर से इस्लाम धर्म में आना चाहती हैं तो तौबा करनी होगी।

आपको बता दें इस्लाम को छोड़कर किसी दूसरे धर्म में शादी करने के कारण नुसरत जहां लगातार गुस्से का शिकार हो रही हैं। वहां तक सब ठीक था लेकिन इस्लाम में रह कर किसी दूसरे धर्म का पालन करना इसकी इस्लाम में शख्त मना है ये इस्लाम के खिलाफ है। आपको बता दें सांसद नुसरत जहां कोलकाता में इस्कॉन रथयात्रा के दौरान आरती की थी जिसके बाद से ही काफी बबा’ल मचने लगा था।

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आपको बता दें आरती करते हुए नुसरत जहां का वीडियो, फोटो सोशल मीडिया पर वायरल होते ही उलेमा ने अपनी प्रतिक्रिया दी हैं। उलेमा ने कहा है कि मजहब-ए-इस्लाम के दायरे को जो भी पार करता है वो इस्लाम से खारिज हो जाता है। नुसरत जहां ने ऐसी गुस्ताखी की है कि यदि वे फिर से इस्लाम धर्म में आना चाहेंगी तो उन्हें तौ’बा करनी होगी।

व्यवसायी निखिल जैन से शादी रचाने वाली नुसरत ने अपने खिलाफ जारी कथि’त फत’वे पर कहा था की फालतू चीजों पर मैं ध्यान नहीं देती। मैं अपना धर्म जानती हूँ। मैं जन्‍म से मुसलमा’न हूँ और आज भी मुसलमा’न हूँ। यह आस्‍था का मामला है। इसे आपको अपने अंदर से महसूस करना होता है न कि अपने दिमाग से।

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आपको बता दें देवबंद के बाद बरेलवी मसलक के उलेमाओ ने शादी पर नहीं बल्कि आरती करने पर एतराज जताया है। उन्होंने कहा कि सियासत करने या सुर्खियों में छाए रहने के लिए मजहब को बदनाम किया जा रहा है। मुफ्ती मुहम्मद गुलाम रजवी ने कहा कि इस्लाम ने औरतों को उनके अधिका’र दिए हैं। सियासत करना अलग है लेकिन गैर शरई काम करना इस्लाम के खिला’फ है। जो भी शख्स मजहब-ए-इस्लाम का दायरा पार करता है वो खुद बे खुद इस्लाम से खारिज हो जाता है।

वही मुफ्ती सय्यद कफील अहमद हाशमी ने नुसरत को लेकर कहा कि आरती करना इस्लाम में मना है। इस तरह के काम करना शरीयत के खिलाफ माना जाता है। सियासत के लिए मजहब को बदनाम करना ठीक नहीं है।

साभार: livehindustan