राम मंदिर निर्माण ट्रस्ट को लेकर आपस में भिड़े साधु-संत, तपस्वी छावनी में तोड़फोड़

अयोध्या: अयोध्या में राम मंदिर और बाबरी मस्जिद के मामले में शनिवार, 9 नवंबर 2019 को सुप्रीम कोर्ट के पांच जजों की पीठ ने फैसला सुनाया था। विवदित जमीन को हिन्दू पक्ष को दी गई थी साथ ही मस्जिद के लिए अयोध्या में पांच एकड़ जमीन देने का निर्देश कोर्ट ने केंद्र सरकार को दिया है। वही सुप्रीम कोर्ट सरकार को निर्देश देते हुए कहा था की ट्रस्ट बनाकर तीन महीने ने मंदिर का निर्माण शुरू किया जाए इससे पहले ही नवगठित होने वाले राम मंदिर निर्माण ट्रस्ट को लेकर साधु-संतों में फूट पड़ गई है।

आपको बता दें राम मंदिर निर्माण के लिए अनशन करने वाले संत परमहंस दास और श्री राम जन्म भूमि न्यास के वरिष्ठ सदस्य डॉ रामविलास दास वेदांती का ऑडियो वायरल हुआ. जिसमें न्यास अध्यक्ष महंत परमहंस दास को लेकर अभद्र टिप्पणी की गई है. ऑडियो वायरल होने के बाद छोटी छावनी के 2 दर्जन से भी ज्यादा संतों ने तपस्वी छावनी पहुंच कर जमकर हंगामा काटा और तोड़ फोड़ की।

इसके बाद मौके पर पहुंची पुलिस फोर्स ने महंत परमहंस दास को जिले से बाहर भेज दिया. साथ ही तपस्वी छावनी और हिंदू धाम की सुरक्षा बढ़ा दी. इसके बाद अयोध्या के संतों में जुबानी जंग तेज हो गई. हंगामे के बाद न्यास के वरिष्ठ सदस्य डॉ. राम विलास दास वेदांती ने अपना एक वीडियो जारी किया है।

जिसमें उन्होंने महंत परमहंस दास पर आरोप लगाते हुए कहा कि वायरल आडियो में उनकी आवाज नहीं है. कोई दूसरा उनकी आवाज में बात कर रहा है, उस ऑडियो से उनका कोई लेना-देना नहीं है. उन्होंने कहा इस तरह का ऑडियो वायरल करके महंत परमहंस दास उन्हें बदनाम कर रहे हैं. उनका कहना है कि मैंने कभी भी पूज्य नृत्य गोपाल दास के लिए ऐसे शब्दों का प्रयोग नहीं किया।

आपको बता दें वायरल ऑडियो में परमहंस उस समय फोन पर पूर्व सांसद रामविलास दास वेदांती से बात कर रहे थे। इस पर वेदांती ने कहा कि वह पागल है। इसके बाद महंत नृत्य गोपाल दास के शिष्यों ने परमहंस दास के तपस्वी छावनी पर हमला कर खिड़कियों के शीशे तोड़ डाले। पुलिस ने परमहंस को हिरासत में ले लिया।

वेतांदी को लेकर भी नृत्य गोपाल दास के शिष्य काफी नाराज दिखाई दिए, लेकिन उनके दिल्ली में होने के कारण कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई। हालांकि प्रशासन ने वेदांती के आवास पर सुरक्षा व्यवस्था को और बढ़ा दिया है।

वही हनुमानगढ़ी के पुजारी राजू दास कहते हैं कि ट्रस्ट पहले से ही है। इसे भव्यता प्रदान करते हुए राम मंदिर अभियान से जुड़े लोगों को शामिल करके इसे संपूर्ण कर दिया जाए। इस ट्रस्ट में बाबा रामदेव, रविशंकर जैसे व्यापारियों की जगह नहीं होनी चाहिए।

दरअसल, विवाद तब शुरू जब हनुमान गढ़ी के पुजारी राजूदास ने ट्रस्ट बनाने के मामले में कहा कि क्यों न सीएम योगी आदित्यनाथ को ही अध्यक्ष बना दिया जाए। यह पता चलने पर रामविलास वेदांती ने अपने खेमे के परमहंस दास से कहा कि वे रामानंद स’म्प्रदाय से आने वाले वेदांती को अध्यक्ष पद मिलने की बात कहें।

वहीं, नृत्य गोपाल दास कई दिनों से कह रहे हैं कि उनके न्यास को ही ट्रस्ट में तब्दील कर इसमें नए लोग शामिल किए जाएं। महंत परमहंस दास ने पलटवार करते हुए कहा था कि ट्रस्ट नया होना चाहिए। इसमें और अच्छे लोग रखे जाएं। इसके बाद विवाद बढ़ता ही चला गया।

साभार: livehindustan