नागरिकता संशोधन बिल के विरोध में उतरे एक हज़ार वैज्ञानिक और स्कॉलर्स, बोले संविधान के खिलाफ है बिल

आज लोकसभा में, गृह मंत्री अमित शाह ने नागरिकता बिल संशोधन पेश किया. हालांकि इस दौरान विपक्षी पार्टियों ने इसके विरोध में काफी हंगामा भी किया. फिर भी नागरिकता संशोधन बिल की सहमति में कुल 375 वोटों में से 293 वोट सहमति में पड़े, जबकि केवल 82 वोट ही ऐसे थे जिन्होंने इस बिल को पास करने में अपनी असहमति जताई. हालाँकि वोटिंग करने से पहले ऐसे सांसदों की गिनती ज़्यादा थी, लेकिन जब वोटिंग प्रक्रिया शुरू हुई तो कुछ और ही देखने को मिला.

इस बिल के पेश होने के बाद AIMIM पार्टी के प्रमुख, असदुद्दीन ओवैसी ने भी लोकसभा सदन में गुहार लगाते हुए कहा कि ऐसे कानून से मुल्क को बचा लीजिए. यह पूरा संविधान के खिलाफ बिल है. इसके बाद उन्होंने चार अलग-अलग बिंदुओं पर अपनी बात भी रखी.

Nagrikta Sansodhan bill

इधर एक्ट्रेस रिचा चड्डा ने भी एक ट्वीट करते हुए इस नागरिकता संशोधन विधेयक को, संविधान के कई प्रावधानों का उल्लंघन बताया. उधर कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी ने भी इस बिल के प्रावधानों को लेकर काफी विरोध किया, जिस पर अमित शाह ने उन्हें टोका भी था कि मैं विपक्ष के हर सवाल का जवाब देने के लिए तैयार हूं.

जब लोकसभा में यह विधेयक पेश किया गया तब उसके बाद से ही, सोशल मीडिया में भी अच्छा खासा हंगामा हो गया. लोग ट्विटर पर इसको लेकर विरोध में उतर पड़े थे.वहीँ नागरिक संशोधन बिल के विरोध में कई स्कॉलर और एक हजार के लगभग भारतीय वैज्ञानिक भी इसके विरोध में उतर आए.

जिन्होंने इसका विरोध करने के लिए एक ऑनलाइन अभियान चलाया, जिसमें कुछ ही घंटों में लगभग 1000 लोगों ने अपने हस्ताक्षर किए. जिसमें जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी से लेकर टोरंटो यूनिवर्सिटी के स्कॉलर और वैज्ञानिक भी शामिल हैं.

स्कॉलर्स की मानें तो, इस बिल में संविधान की मूलभूत बातों को नज़रअंदाज़ किया गया है. यह बिल मानवता के हित में नहीं है. इस तरह का बिल पेश नहीं किया जाना चाहिए था.

फिलहाल यह नागरिकता संशोधन बिल, लोकसभा से पास कर दिया गया है. नागरिकता बिल में जिस तरह से मुस्लिम समुदाय को बाहर रखा गया है, यह देश के बहुलवादी समाज पर नकारात्मक असर डालेगा.