VIDEO: देश को आजादी तोहफे में नहीं मिली, इसके लिए हमारी कौम ने भी कुर्बानि’यां दी हैं: शिक्षिका दिलशाद अफरोज

आज पूरा देश भारतव’र्ष की आजादी का 73वां स्वतंत्रता दिवस को बङी ही धूमधाम के साथ मना रहा है। और भारतीय इसे पूरे ह’र्ष उल्ला’स के साथ राष्ट्रीय अवकाश के तौर पर स्वतंत्रता दिवस के रूप में मनाते है। आजादी के 73 साल बाद यानी सन् 1947 से अब तक भारत ने कई बड़ी उपलब्धियां हासिल की है। आजादी के इस जश्न में हिंदू मुस्लि’म सिख इसाई हर कोई है। स्कूलों से लेकर सभी सरकारी संस्थानों में तिरंगा भी फहराया गया। वही मदरसों में ध्वजारोहण के बाद छात्रों ने राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत गाया।

बता दें 15 अगस्त सन् 1947 के इसी दिन हम अंग्रेजों की गुला’मी से आजाद हुए थे. इसी के चलते हम 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस के रूप में मनाते है। और स्कूलों से लेकर सभी सरकारी संस्थानों में तिरंगा भी फहराया गया। वही मदरसों में ध्वजारोह’ण के बाद छात्रों ने राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत गाया। इसी ख़ुशी के चलते छात्रों को संबोधित करने के बाद मीडिया से बात करते हुए मदरसा की शिक्षिका ने कहा कि देश कि आजादी लाल किले से तोहफे में नही मिली है बल्कि इसके लिए हमारी कौम के हजारों लोगों ने अपनी कुर्बानि’यां दी हैं।

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स्वतंत्रता दिवस के मोके पर नगर क्षेत्र के मदरसा तालीमुद्दी’न में 73वां स्वतंत्रता दिवस बङे ही हर्ष और उल्लास के साथ मनाया गया। इस दौरान आजादी का जश्म मनाने के लिए मुस्लि’म छात्र और शिक्षक मन में देश प्रेम लेकर मदरसों में पहुचे। इसके बाद झंडारोहण कर राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत से वातारवरण को देशभ’क्ति मय बनाया।

तालीमुद्दीन मदरसा कालेज में मुख्य अतिथी के रुप में पहुचे मौलाना मुख्तार अहमद ने बताया कि जितनी धूमधाम से मऊ जिले में आजादी का जश्न मनाया जाता है उतना बड़ा जश्न कहीं और नहीं किया जाता। ये जश्न हमारी आजादी का जश्न है। जिसे हम पिछले 73 सालो से मानते आ रहे है।

 

वहीं तालीमुद्दीन मदरसा महिला कालेज की शिक्षिका दिलशाद अफरोज ने कहा कि आजादी की लङा’ई में हमारे कौम के लोगों ने भी अहम रोल अदा किया है। इसके बाद भी हमारे कौम के लोगों ने कुर्बानि’या दी है और उन्ही को आज दूसरी निगाह से देखा जाता है। इसलिए हम अपने छात्रों को इस आजादी के दिवस पर बस यही कहेगे कि देश की राजनीति में अपना अहम रोल अदा करने के लिए आगे आये।

क्योकि जिससे देश और कौम की तरक्की के लिए कुछ कर सके। क्योकि देश की आजादी लालकिले से तोहफे के रुप में नही मिली है। इसके लिए सभी समुदाय के लोगों ने अपने जा’न की कुर्बानीयां दिया है। तब कही जाकर हमारा देश आजाद हुआ है। और इसपर हमें गर्व है की आज हम आजाद भारत वासिं’दे है।