अयोध्या मामले पर बोले ओवैसी कहा- वहां मस्जिद थी, है और रहेगी, मेरी लड़ाई 5 एकड़ जमीन की नहीं बल्कि…

नई दिल्ली: अयोध्या मामले पर सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला आ चुका है. इस फैसले पर मुस्लि’म पक्षकार एम सिद्दीकी और ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने पुनर्विचार याचिका दाखिल कर दी है। वही लोकसभा सांसद और (AIMIM)
के प्रमुख असदुद्दीन औवेसी (Asaduddin Owaisi) ने NDTV से बातचीत में अयोध्या मामले (Ayodhya Case) को लेकर अपने विचार रखे. उन्होंने इस मामले में पुनर्विचार याचिका डालने को लेकरकहा कि संविधान उन्हें इस बात का अधिकार देता है।

एआईएमआईएम के प्रमुख असदुद्दीन औवेसी (Asaduddin Owaisi) ने कहा की हम लोग पुनर्विचार याचिका इसलिए डाली जा रही है. सबरीमला मामले में भी डाली गई थी. ओवैसी ने कहा, जब सुप्रीम कोर्ट अपने जजमेंट में कहता है कि 1949 में मूर्तियां रख दी गईं थी 6 दिसंबर 1992 (6 December 1992) को ढांचा गिराए जाने की घट’ना को वह अपरा’ध बता रहे है. 1934 में हुए दं#गों को अपरा’ध बता रहे है. तो ये जगह हिंदुओं को कैसे मिल सकती है?

मेंरी लड़ाई पांच एकड़ की लड़ाई नहीं है, बल्कि मेरी लड़ाई मेरी मस्जिद की लड़ाई है: असदुद्दीन औवेसी

सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर सवाल उठाते हुए ओवैसी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट सबसे बड़ा है। पर अचूक नहीं ओवैसी ने कहा कि मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की तरह वह भी फैसले से सहमत नहीं हैं। ओवैसी ने कहा कि बीजेपी और आरएसएस खुद बाबर के समय को सां’प्रदायि’क तौर पर बेह’द क्रू’र मानते हैं. ऐसे में कैसे संभव है कि वहां मस्जिद में नमाज की इजाजत नहीं दी गई होगी. उन्होंने कहा कि मुझे विश्वास है हम इस मामले को मजबूती से कोर्ट के सामने रखेंगे।

वही उन्होंने सुप्रीम कोर्ट द्वारा मुस्लि’म पक्ष को 5 एकड़ जमीन देने के फैसले को कहा की वह फैसला नहीं है। देश का मुसलमा’न भले ही गरीब हो लेकिन इतना भी कमजोर नहीं कि 5 एकड़ जमीन न मिले तो मस्जिद नहीं बना सकता. उन्होंने कहा कि अभी अगर में बिहार के सबसे पिछड़े इलाके सीमांचल में जाकर भी मैं भीख मांगूगा तो 2 घंटे में पैसे मिल जाएंगे और मस्जिद बना लूंगा।

ओवैसी ने कहा कि मेंरी लड़ाई पांच एकड़ की लड़ाई नहीं थी, बल्कि मेरी लड़ाई मेरी मस्जिद की लड़ाई है। आपको बता दें सुप्रीम कोर्ट ने बीते 9 नवंबर को अयोध्या मामले पर ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए विवादित 2.77 एकड़ भूमि को राम मंदिर को दे दी है।

वही चीफ जस्टिस रंजन गगोई की अध्यक्षता वाली पीठ के पांच न्यायाधीशों ने मस्जिद बनाने के लिए पांच एकड़ जमीन सुन्नी वक्फ बोर्ड को भी देने का आदेश दिया. जिसके बाद ऑल इंडिया मुस्लि’म पर्सनल लॉ बोर्ड और जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने अदालत के फैसले के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दायर करने का निर्णय लिया है।