रमज़ान के पाक़ महीने में पटना की इस मस्जिद ने महिलाओं के लिए खोले अपने दरवाज़े

देश में मौजूद सभी मस्जिदों में महिलों को नमाज़ पढ़ने की इजाजत नहीं दी जाती है. कुछ चुनिंदा मस्जिदों को छोड़ दिया जाए तो महिलाएं मस्जिद जाकर नमाज़ अदा नहीं कर सकती है. सिर्फ कुछ ही मस्जिदों में उन्हें नमाज़ पढ़ने की इजाजत दे रखी है. इस प्रथा को लेकर पिछले कई सालों से विवाद और बहस की स्थिति बनी हुई है.

हाल ही में यह मामला सुप्रीम कोर्ट भी पहुंच गया है जिसके बाद एक बार फिर से इसे लेकर जोरो से बहस छिड़ गई है. इसी बहस के बीच पटना सिटी की एक मस्जिद ने एक अनोखी पहल की है. पटना सिटी की मस्जिद ने महिलाओं को तरावीह की दुआ में भाग लेने की इजाज़त दे दी है.

यह रमज़ान के महीने में होने वाली ख़ास दुआ होती है. पटना सिटी के मितन घाट स्थित खानकाह मुजीबिया मस्जिद ने महिलाओं को ये इजाज़त दी है. ख़ानकाह मुजीबिया मस्जिद में न सिर्फ महिलाओं को एक ख़ास कोना दिया जायेगा बल्कि उनके लिए एक हाफ़िज़ भी मौजूद होगा.

इसके आलावा वज़ू के लिए भी महिलाओं को एक ख़ास जगह दी जाएगी. बता दें कि इस मस्जिद में कई सूफ़ी संतों जैसे मुल्ला मितन, हज़रत मख़दूम मुनीम पाक के मक़बरे भी हैं.

ख़ानकाह के प्रशासनिक अधिकारी हज़रत सैयद शाह शामीमुद्दीन अहमद मुनेमी ने कहा कि आने वाले समय में ख़ानकाह को सूफ़ी विश्वविद्यालय में तब्दील किया जाएगा. हम सूफ़ी स्टडी सेंटर के जरिए प्यार और सौहार्द का संदेश देना चाहते हैं. इस देश की संस्कृति के बारे में बताना चाहते हैं. हमें समुदाय की महिलाओं की उम्मीदों का भी अंदाज़ा है.

मुनेमी ने आगे कहा कि मस्जिदों में महिलाओं के प्रवेश पर कोई पाबंदी नहीं है. बल्कि इससे जुड़े कई मिथक हैं और यह अभी भी कई लोगों के दिमाग में है. इसीलिए महिलाएं शहर या राज्य के किसी मस्जिद में नमाज़ अदा करते नजर नहीं आती है.

आपको बता दें कि पिछले दिनों से ही सुप्रीम कोर्ट में पुणे के एक दंपत्ति ने PIL दायर की थी. जिसमें उन्होंने मुस्लिम महिलाओं को मस्जिदों में नमाज़ अदा करने की इजाज़त देने की मांग की है. उन्होंने कहा है कि कुरान महिलाओं के मस्जिद में नमाज़ पढ़ने पर पाबन्दी नहीं लगाता है और न ही पैगंबर मोहम्मद मस्जिद में महिलाओं के नमाज़ पढ़ने के ख़िलाफ़ थे.