फलस्तीन को लेकर ईरान ने दिया बड़ा बयान

फिलिस्तीन के मुद्दे पर बोलते हुए इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता ने कहा है कि फ़िलिस्तीनियों के समर्थन के दो प्रमुख कारण जो है वो मानवीय और धार्मिक हैं. आयतुल्लाहिल उज़्मा सैयद अली ख़ामेनेई ने कहा कि मौजूदा समय में अमरीका और उसके कुछ सहयोगी घटक, डील आफ सेंचुरी को लागू करने के कोशिशों में जुटे हुए है लेकिन वो इसमें विफल रहेंगे.

बुधवार की शाम विश्वविद्यालयों के छात्रों और प्रोफेसरों को संबोधित करते हुए वरिष्ठ नेता ने कहा कि इस बार का विश्व क़ुद्स दिवस पिछले वर्षों की तुलना में बहुत ही ज्यादा महत्वपूर्ण है. उन्होंने कहा कि अमेरिकी की डील आफ द सेंचुरी को लागू कराने की दृष्टि इस बार के विश्व क़ुद्स दिवस का महत्व बहुत बढ़ जाता है.

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पार्स टुडे डॉट कॉम के मुताबिक वरिष्ठ नेता ने कहा कि डील आफ द सेंचुरी के द्वारा फ़िलिस्तीन के विषय को सदा के लिए खत्म करने की कोशिश हो रही हैं. इसीलिए विश्व क़ुद्स दिवस का महत्व बहुत अधिक है क्योंकि यह फ़िलिस्तीनियों के अधिकारों की रक्षा का दिन है.

आयतुल्लाहिल उज़्मा सैयद अली ख़ामेनेई ने कहा कि विदेशी मीडिया में चर्चा है कि ईरान को अमेरिका के साथ वार्ता की मेज़ पर वापस आना चाहिए. हमें किसी देश से कोई समस्या नहीं है और हम यूरोप तथा अन्य पक्षों के साथ वार्ता करते रहे हैं.

वरिष्ठ नेता ने आगे कहा कि लेकिन वार्ता का मुख्य बिंदु, वार्ता के विषय का निर्धारण होता हैं. हम हर मुद्दे पर चर्चा नहीं कर सकते. खासतौर पर देश की रक्षा क्षमता जैसे संवेदनशील विषय को वार्ता का विषय नहीं बनाया जा सकता हैं. इसलिए इतना तो तय है कि इस्लामी गणतंत्र ईरान, अमरीका के साथ कभी वार्ता नहीं करेगा.

वरिष्ठ नेता ने कहा कि हम पहले भी कह चुके हैं कि अमरीका के साथ वार्ता का कोई लाभ नहीं है बल्कि इससे नुक़सान ही होगा. आयतुल्लाहिल उज़्मा सैयद अली ख़ामेनेई ने ईरान पर अमरीकी दबाव का जिक्र करते हुए बोले कि अमरीकी दबाव के मुक़ाबले में इस्लामी गणतंत्र ईरान के पास आवश्यक युक्तियां और साधन मौजूद हैं.

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