शरद पवार बोले: महाराष्ट्र में सरकार बनाने को लेकर PM मोदी ने दिया था बड़ा ऑफर, लेकिन मैंने प्रस्ताव ठुकरा दिया…

महाराष्ट्र: सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के फैसले के बाद आखिरकार महाराष्ट्र में दवेंद्र फडणनवीस (Devendra Fadnavis) की सरकार दूसरी पारी महज 80 घंटों में खत्म हो गयी। महाराष्ट्र में भाजपा ने अजित पवार पर भरोसा कर सियासत में चैंकाने वाला फैसला लिया था। और सरकार को 24 घंटे में सदन में बहुमत सि़द्ध करना था लेकिन इससे पहले ही फडणनवीस और उपमुख्यमंत्री अजित पवार (Ajit Pawar) ने त्यागपत्र दे दिया था बाद उनके पास इस्तीफा देने के सिवाय कोई विकल्प नहीं बचा।

वही अब महाराष्ट्र में शिवसेना (Shivsena), (NCP) एनसीपी और कांग्रेस (Congress) के गठबंधन महाविकास अघाड़ी की सरकार बनने के बाद एनसीपी चीफ शरद पवार ने बड़े खुलासे किए हैं। सरकार गठन के बाद ABP News के सहयोगी चैनल ABP Majha को दिए पहले इंटरव्यू में उन्होंने बताया कि सरकार गठन पर मचे घमासान के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें अपने साथ आने का ऑफर दिया था।

PM मोदी चाहते थे हम साथ मिलकर काम करें: शरद पवार

शरद पवार (Sharad Pawar) ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साथ मिलकर सरकार बनाने का प्रस्ताव दिया था, लेकिन मैंने इस पर ज्यादा सोचा नहीं और उस प्रस्ताव को ठुकरा दिया। मैंने उनसे कहा था कि हमारे निजी संबंध बहुत अच्छे हैं और वे हमेशा रहेंगे, लेकिन मेरे लिए आपके साथ मिलकर काम करना संभव नहीं है। हलाकि शरद पवार ने ऐसी खबरों को खारिज कर दिया कि मोदी सरकार ने उन्हें देश का राष्ट्रपति बनाने का प्रस्ताव दिया।

पवार के मुताबिक, मोदी ने उनसे कहा था कि साथ आइए आनंद आएगा। यही नहीं, पीएम ने कहा था कि वह केंद्रीय कैबिनेट में एनसीपी चीफ की बेटी सुप्रिया सुले को मंत्री पद देंगे, मगर पवार ने उनकी इस पेशकश को ठुकराते हुए कहा था कि अभी BJP के साथ उनका आना संभव नहीं है।

हलाकि पवार ने यह दावा भी किया INC अंतरिम चीफ सोनिया गांधी गठबंधन के लिए राजी नहीं थीं। न ही भाजपा के पूर्व सहयोगी शिवसेना के मुखिया उद्धव ठाकरे मुख्यमंत्री बनने के लिए राजी थे, पर इन दोनों को खुद उन्होंने ही मनाया। हालिया साक्षात्कार में उन्होंने पार्टी से बगावत करने वाले भतीजे अजित पवार को लेकर भी अपनी राय जाहिर की।

शरद पवार ने कहा कि 28 नवंबर को जब उद्धव ठाकरे ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली तो उस समय अजित पवार को शपथ नहीं दिलाने का फैसला सोच समझकर लिया। पवार ने कहा, जब मुझे अजित के फडणवीस को दिए गए समर्थन के बारे में पता चला तो सबसे पहले मैंने ठाकरे से संपर्क किया. मैंने उन्हें बताया कि जो हुआ वह ठीक नहीं है और उन्हें भरोसा दिया कि मैं इसे अजित के बगावत को दबा दूंगा।

उन्होंने कहा, जब राकांपा में सबको पता चला कि अजित के कदम को मेरा समर्थन नहीं है, तो जो पांच-दस विधायक उनके अजित साथ थे, उनपर दबाव बढ़ गया।वही राकांपा प्रमुख ने कहा कि उन्हें नहीं पता कि पवार परिवार में क्या किसी ने(अजित पवार से फडणवीस को समर्थन देने के उनके फैसले पर पुनर्विचार करने के लिए बात की थी।

लेकिन परिवार के सभी का मानना था कि अजित ने गलत किया. उन्होंने कहा, बाद में मैंने उनसे कहा कि जो कुछ भी उन्होंने किया वह क्षम्य नहीं है. जो कोई भी ऐसा करेगा उसे परिणाम भुगतान होगा और आप अपवाद नहीं हैं। उन्होंने कहा, साथ राकांपा में एक बड़ा हिस्सा है, जिसकी उनमें आस्था है वह काम करा देते हैं।