क@ठुआ केस: पुलिसवाले ने पुजारी से कहा था- लड़की की सांस रोक कर रखो मैं भी कुछ कर लूं, फिर मार देना

देश को हिलाकर रख देने वाले बहुचर्चित केस जो एक नाबालिग बच्ची के साथ पहले गलत काम फिर उसके क@त्ल को लेकर सोशल मीडिया से लेकर जमीनी तौर पर जो लोगों का गुस्सा फूटा था उस से कौन वाकिफ नहीं है. लेकिन उस मासूम बच्ची के 7 गुनाहगारों में से 6 को अदालत ने उस बच्ची के साथ इंसाफ करते हुए 6 लोगों को कसूरवार ठहराया है. अब ये सभी लोग अपने कुक@र्मों की सज़ा भुगतेंगे.

हैरत की बात यह है कि किसी इंसान के इस कदर नीचे गिरने की हद आप देखते रह जाएंगे. लोगों की मानसिकता का स्तर कितना गिर सकता है कि 1 हफ्ते तक 8 लोग मिलकर एक बच्ची के साथ ज्यादती करते रहे और जब ये उसको मारने जा रहे थे तब एक पुलिस अफसर फोन करके उनसे बोलता है कि ‘कुछ देर रुक जाओ’ लड़की की सांसे रोककर रखो मैं भी इसके मजे ले लूं फिर चाहे मार देना.

दीपक खजुरिया Source: Google

आपको बता दें यह शब्द उस स्पेशल पुलिस अफसर दीपक खजुरिया के थे जो उसी मामले की जांच कर रहा था. मतलब की जिस लड़की के बाप ने लड़की का गुमशुदा होने की रिपोर्ट दर्ज कराई थी. इसके बाद से दीपक खजुरिया उसी मामले की जांच कर रहा था.

8 दिन तक मंदिर में करते रहे बच्ची के साथ कुक@र्म

इस पढ़े लिखे नीच मानसिकता के इन्सान ने जो किया है इससे हर इंसान का सर शर्म से झुक गया है. पवित्र मंदिर में एक नाबालिग के साथ ग्राम प्रधान सांझी राम ने उस बच्ची को न केवल बंधक बना के रखा उसको यह लोग बार बार बेहोशी की दवा देकर उसके साथ गलत काम करते रहे.

कोर्ट में दाखिल चार्जशीट में भी इस बात का जिक्र है की मंदिर के प्रार्थना कक्ष में ही बच्ची के साथ गलत काम होता रहा. जिसमे से सबसे पहले सांझी राम के भतीजे ने उस बच्ची के साथ दरिंदगी की. फिर उसने इस काम में अपने दोस्त मन्नू को शामिल किया.

आपको बता दें कि इससे केस में पठानकोट की स्पेशल कोर्ट ने मुख्य आरोपी राम जोगी गिरधारी राम प्रधान भी स्पेशल पुलिस ऑफिसर जिसका जिक्र अभी हमने उन पर किया था दीपक खजुरिया, एक ऑफिसर जिसका नाम सुरेंद्र कुमार और पास के ही रसाना गांव का प्रवेश कुमार और एक असिस्टेंट सब इंस्पेक्टर जिसका नाम है आनंद.

एक हेड कांस्टेबल तिलक राज इन सभी लोगों को अदालत ने सजा सुना दी है, जबकि मुख्य आरोपी सांझी राम के बेटे विशाल को बरी कर दिया गया है. हालांकि उस पर एक मुकदमा जम्मू कश्मीर हाई कोर्ट में चल रहा है इस मामले में एक नाबालिग आरोपी जो की सांझी राम का भतीजा है उस पर फिलहाल सुनवाई चल रही है.

इन खानाबदोशों को गाँव से हटाने के लिए बनाई थी यह योजना

हिंदी समाचार वेबसाइट News 18 के अनुसार यह बच्ची बकरवाल समुदाय से ताल्लुक रखती थी. यह एक अल्पसंख्यक समुदाय है जो कि खानाबदोश है और ये लोग जगह-जगह डेरे डालकर अपने पशुओं को रखते हैं और उनसे उनके जरिए इनका जीवन यापन होता है.

दरअसल क@ठुआ के गांव रसाना में जहाँ की यह घटना है वहां इस समुदाय के कुछ परिवार आकर बस गए थे. देवी मंदिर का सेवादार सांझी राम जो कि मुख्य आरोपी है. यह समुदाय के लोगों को गांव से हटाना चाहता था इसलिए उसने यह पूरी साजिश रची यह हैरत की बात है कि सांझी राम राज्य अधिकारी के पद से रिटायर हुआ था.

यह उस मासूम बच्ची को रोजाना अपने पशुओं को चराने के लिए जंगल ले जाते हुए देखता रहता था. इसी के चलते इसने इस तरह की योजना अपने दिमाग में बनाई यहां तक कि उसने अपनी नाबालिग भतीजे तक को इस गलत काम को करने के लिए तैयार कर लिया था.