सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों में निजीकरण को लेकर मोदी सरकार के खिला’फ गुस्सा

केंद्र सरकार द्वारा लिए गए निजीकरण के फैसले को लेकर सरकारी कर्मचारी अपना विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं| पीएसयू कर्मचारीयों ने मोदी सरकार के ऊपर अपना गुस्सा ज़ाहिर करते हुए नज़र आ रहे हैं| बता दें कि केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रमों में अपनी हिस्सेदारी को कम करने के लिए केंद्रीय ट्रेड यूनियनों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार की नीति के खिला’फ गुस्सा जाहिर किया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने केंद्रीय बजट में इस साल विनिवेश से 1.05 लाख करोड़ रुपए निकालने का ल’क्ष्य रखा है।

आपको बता दें कि सरकार की इस योजना पर सेंट्रल ट्रेड यूनियन जैसे सीआईटीयू एआईटीयूसी आईएनटीयूसी एलपीएफ एसईडब्ल्यूए और एचएमएस ने वाणिज्य मंत्रालय के स्टेड ट्रेडिंग कॉर्पोरेशन एसटीसी प्रोजेक्ट और परियोजना और उपकरण निगम पीईसी के बंद करने के प्रस्तावों का विरो’ध करने की धम’की दी है।

इसी के चलते सीपीएम पोलित ब्यरो के सदस्य तापन सेन ने कहा कि हम मोदी सरकार की सभी वित्तीय योजनाओं के खिलाफ 30 सितंबर को एक महा रैली शुरू करने जा रहे हैं। इसमें एसटीसी और पीईटी के बिक्री के मुद्दे को शामिल किया गया है। इन्ही के साथ पशु व्यापार ट्रेड यूनियन के एक लीडर ने भी कहा कि सरकार के कदम स्प’ष्ट रू’प से रा’ष्ट्र हित के खिला’फ है।

जानकारी के लिए आपको बता दें कि केंद्र सरकार ने साल 1956 में ट्रेड यूनिय’न कॉर्पोरे’न का गठन किया था जिसमे पीएसयू मुख्य रूप से पूर्वी यूरोपीय देशों के साथ व्यापार में शामिल था जो कि तत्कालीन सोवियत संघ के नेतृत्व वाले कम्युनिस्ट ब्लॉक का हिस्सा थे। बाद में एसटीसी बड़े पैमाने पर रसायन दवाईयों थोक वस्तुओं जैसे खाद्य तेल सीमेंट चीनी गेहूं और यूरिया के आयात निर्यात में शामिल कर दिए गए।

अंग्रेजी न्यूज वेबसाइट फाइनेंशियल एक्सप्रेस में छपी खबर के मुताबिक एसटीसी की स्थापना के 15 साल बाद सरकार ने रेलवे और इंजीनियरिंग उपकरणों के निर्यात को संभालने के लिए PEC को 1971 में STC की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी के रूप में स्थापित किया। बाद में 1997 में पीईसी को एक स्वतंत्र कंपनी के रूप में शामिल कर लिया गया।

लेकिन फिर उदारीकरण के साथ व्यापार और आयात निर्यात पर इन सार्वजनिक उपक्रमों की पकड़ कमजोर होती चली गई और कंपनी के सभी खाते एनपीए में बदल गए हैं और यही वजह है कि वित्त वर्ष 2018-19 में एसटीसी को 881 करोड़ का शुद्ध घा’टा हुआ जबकि 2017-18 के वित्त वर्ष में कंपनी को 38 करोड़ रुपए शुद्ध लाभ हुआ था।

इसी के चलते वाणिज्य मंत्रालय ने इन दोनों सार्वजनिक उपक्रमों एसटीसी और पीईसी को बंद करने का फैसला लिया है जबकि देश के सबसे बड़े पब्लिक सेक्टर ट्रेडर MMTC लिमिटेड का पूरी तरह पुर्नोत्था’न किया जाएगा। इसके लिए वाणिज्य मंत्रालय कैबिनेट मंजूरी का इंतजार कर रहा है। हालांकि सरकार के इस कदम का ट्रेड यूनियनों और कर्मचारी यूनियन फेडरेशन का समर्थन नहीं मिला है।

आपको बता दें कि मोदी सरकार द्वारा लिए गए दस पब्लिक सेक्टर के बैंकों को चार बड़े बैंकों में तब्दील करने के फैसले का बैंक यूनियन पहले ही खासे विरोध में हैं। ऐसे में एसटीसी और पीईसी को पूरी तरह बंद करने का प्रस्ताव सरकार के लिए और परेशानी पैदा कर सकता है।

इस पूरे मामले के चलते पूर्व राज्य सभा सदस्य तापन सेन ने फाइनेंशियल एक्सप्रेस से कहा कि हर कोई सरकार के इस कदम का कड़ा विरो’ध कर रहा है। सभी सेंट्रल ट्रेड यूनियन और फेडरेशन ऑफ एंप्लॉय यूनियन ऑफ बैंकिंग इंश्योरेंस डिफेंस सेक्टर सिवाय भारतीय मजदूर संघ के 30 सितंबर को महारै’ली में विरो’ध प्रदर्शन करेंगी।

साभारः #Jansatta