क़िस्सा: हज़रत अनस रज़िअल्लाह अन्हु फ़रमाते हैं कि, एक दिन अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने मुझे कहीं भेजना चाहा तो मैंने…..

हज़रत अनस रज़िअल्लाह अन्हु अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के पास दस साल तक रहे, हज़रत अनस बचपन में ही अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के पास आ गए थे।

और हुज़ूर अलैहिस्सलाम की खिदमत करते थे, हज़रत अनस से कई ऐसी रिवायत मिलती हैं, जिनमें अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के आला अखलाक का पता चलता है।

हज़रत अनस रज़िअल्लाह अन्हु से रिवायत है कि, अल्लाह के रसूल मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम सबसे मुहब्बत से पेश आते थे, खुद वह फरमाते हैं कि मै हुज़ूर की खिदमत में दस साल तक रहा लेकिन कभी आपने मुझे ना डाँटा और ना ही सख्त बात कही।

हज़रत अनस रज़िअल्लाह अन्हु अपने बचपन का एक वाक़्या ज़िक्र फरमाते हैं कि…

एक दिन ऐसा हुआ कि अल्लाह के रसूल हजरत मुहम्मद मुस्तफ़ा सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम ने मुझको किसी काम से कहीं भेजना चाहा, मेरे दिल में वहां जाने के लिए था लेकिन मैंने कह दिया मैं नहीं जाऊँगा, और मैं चल पड़ा बाज़ार से गुज़र रहा था तो एक जगह बच्चे खेल रहे थे तो मैं वहीं ठहर गया|

इतने में अचानक अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम वहां पर तशरीफ़ लाए और मैं ने अल्लाह के रसूल को देखा तो वो मुस्कुरा रहे थे, फिर अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम मुझसे फरमाने लगे अरे अनस तुम वहां जा रहे हो जहाँ मैंने भेजा था, हज़रत अनस बयान करते हैं मैंने अर्ज़ किया हाँ या रसूलअल्लाह मैं अब जा रहा हूँ। मुस्लिम शरीफ हदीस नंबर 385

हज़रत अनस ने बचपन की नादानी की वजह से हंसी में अल्लाह के रसूल के हुक्म का इंकार कर दिया था, लेकिन अल्लाह के रसूल ने उन्हें कुछ नहीं कहा बल्कि और मुहब्बत से पेश आये आपने जब हज़रत अनस को बाज़ार में देखा तो अनस के बजाए उनैस कहा अरबी लोग जब किसी को मुहब्बत से बुलाते हैं तो अरबी में जो नाम होते हैं उसकी तसगीर बोलते हैं, जैसे अनस से उनैस| यह अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की मुहब्बत और शफ़क़त थी।

हमें भी चाहिए कि हम अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के एखलाक़ को अपनाएँ, और अपने नौकरों, काम करने वालों से अच्छा बर्ताव करें, क्योंकि वो भी हमारी तरह इंसान हैं।