इकबाल अंसारी ने सुन्नी वक्फ बोर्ड के दावे को नकारा कहा- विवादित जगह पर राम की मूर्तियां हिन्दुओं ने जबरदस्ती…

बाबरी मस्जिद को लेकर चल रहे विवाद का अब सुप्रीम कोर्ट में 18वं दिन है| विवादित जमीन को लेकर चल रहे सुप्रीम कोर्ट में हिन्दू पक्ष की दलीलें पूरी हो गयी हैं| सुप्रीम कोर्ट में अब 18वें दिन कि सुनवाई मंगलवार को होगी| इस सुनवाई में मुस्लि’म पक्ष अपनी दलील रखेंगे| आपको बता दें कि मुस्लि’म पक्ष ने हिंदू पक्ष पर आरोप लगाते हुए कहा है कि हिंदुओं ने विवादित जगह पर भगवान राम की मूर्तियां चोरी चुपके से रखी थीं। सुन्नी वक्फ बोर्ड की ओर से दलील पेश करते हुए वकील राजीव धवन ने बताया कि मुस्लि’म समाज को नमाज अदा करने से रोकानें के लिए हिंदु’ओं ने ऐसा किया था।

इसके बाद उन्होंने कहा कि इतना ही नहीं बल्कि हिन्दुओं ने विवादित ढां’चे में आ’स्था को आधार बनाकर मूर्ति को स्थापित भी किया था। उन्होंने कहा कि देश के आजाद होने की तारीख और संविधान की स्थापना के बाद किसी धार्मिक स्थल का परिवर्तन नहीं किया जा सकता। महज स्वयं’भू होने के आधार पर यह निष्क’र्ष नहीं निकाला जा सकता कि अमुक स्थान किसका है।

इसके बाद उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट से मैं चाहूंगा कि वह इस मामले के तथ्यों के आधार पर फैसला दें। मूर्ति चोरी से रखी गई थी अयोध्या विवाद पर विराम लगना ही चाहिए। अब राम के नाम पर कोई रथयात्रा नहीं निकलनी चाहिए। बाबरी मस्जिद में भगवान राम की मूर्ति स्थापित करना छल से हमला करना है।

उन्होंने यह भी बताया कि मु’स्लि’म पक्ष के पास विवादित जमीन के कब्जे के अधिकार नहीं हैं क्योंकि 1934 में निर्मोही अखाड़ा ने गलत तरीके से कब्जा कर लिया था। इसके बाद वहाँ पर नमा’ज अदा नहीं की गई।

खास खबर पर छपी खबर के मुताबिक़ RSS की प्रतिक्रिया भी सामने आ रही हैं। इंद्रेश ने कहा कि अब मुस्लि’म पक्ष का पाखंड सामने आ चुका है। खुदाई में प्रमाण सामने हैं। हजारों साल से वहां मंदिर था। भारत और विश्व में हर किसी को समझना चाहिए कि जब 130 करोड़ लोगों के साथ मक्का मदीना वेटिकन सिटी सारनाथ जैसी जगहों की ऐतिहासिकता को मानते हैं तो ठीक उसी तर्ज पर हिंदुओं की भावना का भी सम्मान करना चाहिए।

आपको बता दें कि इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने सुनावई के दौरान चेन्नई के पूर्व प्रोफेसर एन षणमुगम के खिलाफ नोटिस भी जारी किया है। षणमुगम पर आरोप है कि उन्होंने राजीव धवन को धम’की देते हुए कहा था कि वे सुन्नी वक्फ बोर्ड की तरफ से केस लड़’ना बंद कर दें|