VIDEO: RBI की रिपोर्ट ने खोली मोदी सरकार की पोल, सबसे निम्न स्तर पर उपभोक्ताओं का भरोसा-

मोदी सरकार द्वारा किये गए कामों की अब तक भरपाई नहीं हो पा रही है| वहीँ मोदी सरकार देश की गिरती अर्थ्विवास्ता को लेकर कोई फैसले नहीं ले पा रही है| जनता का भरोसा धीरे धीरे सरकार से उठता जा रहा है| साथ ही मोदी सरकार की परेशानियां बढ़ती हुई नज़र आ रही हैं इन सब के चलते अभी हाल ही में RBI यानी रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने शुक्रवार को अपनी मौद्रिक नीति रिपोर्ट जारी की है, जिसमें साफ़ कहा गया है कि सितंबर 2019 में उपभोक्ताओं का भरोसा छह साल के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है|

रिपोर्ट के मुताबिक, वर्तमान स्थिति इंडेक्स Current Situation Index सितंबर महीने में 89.4 तक पहुंच गया है जो पिछले 6 सालों की तुलना में सबसे खराब है| इससे पहले यह इंडेक्स सितंबर, 2013 में सबसे खराब दर्ज किया गया था जब यह गिरकर 88 तक पहुंच गया था|

आपको बता दें कि आरबीआई हर तिमाही में एक बार उपभोक्ता विश्वास सर्वेक्षण Consumer Confidence survey करता है, जिसमें कई बड़े शहरों से लगभग 5,000 उपभोक्ताओं की आर्थिक स्थिति को लेकर राय मां’गी जाती है| इस सर्वेक्षण में पांच आर्थि’क मु’द्दों पर उपभोक्ताओं का मनोभाव नापा जाता है जिनमे आर्थिक हालत रोजगा’र, मू’ल्य स्त’र, आमदनी और खर्च शामिल है|

साथ ही उपभोक्ता विश्वास सर्वेक्षण में मुख्य रूप से वर्तमान स्थिति और भविष्य की अपेक्षाओं के इंडेक्स बनाए जाते हैं| वर्तमान स्थिति की दरें पिछले एक साल में उपभोक्ता द्वारा महसूस किये गए आर्थिक बदलावों से नापी जाती हैं| वहीं भविष्य’काली’न अपेक्षा’ओं के लिए आगे आने वाले एक साल में आर्थि’क परिस्थितियों पर उपभोक्ताओं की राय मांगी जाती है|

इन सब के चलते आरबीआई के सितंबर सर्वेक्षण में यह साफ हुआ कि वर्तमान स्थिति और भवि’ष्यकाली’न अपेक्षा दोनों पैमाने पर उप’भोक्ता’ओं ने असंतो’ष जताया है| बता दें कि जब वर्तमान स्थिति की दर 100 से ऊपर होती है तब उपभोक्ता आशावादी होते हैं वहीँ 100 से नीचे होने पर निरा’शावा’दी|

जानकारी के मुताबिक़ सितंबर 2013 में यह इंडेक्स 88 तक पहुँच गया था| मोदी सरकार के आने के बाद उपभोक्ता विश्वास में तेजी से वृद्धि हुई और सितंबर 2014 के सर्वेक्षण तक वर्तमान स्थिति इंडेक्स 103.1 तक पहुंच गया था| वहीँ दिसंबर 2016 तक, यह 100 से ऊपर ही रहा यानी उपभोक्ता आशावा’दी रहे लेकिन नवंबर 2016 में हुई नोटबं’दी के बाद उपभोक्ताओं का विश्वास गिर गया|

RBI के दिसंबर 2016 राउंड के बाद उपभोक्ता लगभग दो-ढाई साल तक निराशावादी रहे, यानि इस दौरान वर्तमान स्थिति इंडेक्स 100 से नीचे ही रहा है और 2019 के चुनावों तक उपभोक्ता निराशावादी ही रहे| मार्च 2019 के सर्वेक्षण से पता चलता है कि चुनाव से ठीक पहले उपभोक्ताओं की आशाएं बढ़ी थीं|

बता दें कि चुनाव से पहले वर्तमान स्थिति इंडेक्स 104.6 तक पहुंच गया था लेकिन ये आशाएं ज्यादा देर तक नहीं टिक पाईं और चुनाव के ठीक बाद वर्तमान स्थिति इंडेक्स तेजी से नीचे गिरना शुरू हो गया| मई 2019 के सर्वेक्षेण में उपभोक्ता विश्वास इंडेक्स 97.3 तक आ गिरा और जुलाई में यह फिर गिरकर 95.7 तक पहुंच गया| अब सितंबर में यह गिरकर 89.4 तक आ पहुंचा है जो कि मोदी सरकार के कार्यकाल में अब तक का सबसे खराब स्तर है|

जानकारी के लिए बता दें कि वर्तमान हालात को लेकर लोगों में असंतोष देखने को तो मिला ही, साथ ही भविष्य के लिए भी वे आशावान नहीं हैं| भविष्यकालीन अपेक्षाओं का इंडेक्स जुलाई 2019 में 124.8 था जो सितंबर में हुए सर्वेक्षण में 118 तक आ गिरा है|

साथ ही आपको बता दें कि RBI की रिपोर्ट में कहा गया है कि संभावनाओं की ओर देखें तो रिजर्व बैंक के मई, जुलाई और सितंबर के सर्वेक्षण चक्र में उपभोक्ताओं की विश्वसनीयता लगातार कम होती गई है, क्योंकि सामान्य आर्थिक स्थितियों तथा रोजगार परिदृश्य के प्रति मनोभा’व कमजोर बना हुआ था

साभारः #Aajtak