10 दिन में अयोध्या सहित ये 4 बड़े ऐतिहासिक फैसले सुनाकर रिटायर होंगे CJI रंजन गोगोई

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट के प्रधान न्यायाधीश जस्टिस सीजेआई रंजन गोगोई आनेवाली 17 नवंबर को रिटायर हो रहे हैं। रिटायरमेंट से पहले उन्हें 10 बड़े मुकदमों पर फैसला सुनाना है। जिससे भारत में बहुत कुछ बदल जाएगा या इन फैसलों का असर काफी ‘प्रभावकारी’ हो सकता है. जब हम नवंबर महीने में आने वाले सुप्रीम कोर्ट के फैसलों की बात करते हैं तो सबसे पहले दिमाग में अयोध्या विवाद आता है।

आपको बता दें गुरुवार और शुक्रवार की वर्किंग के बाद कोर्ट शनिवार और रविवार को बंद रहेगी। बीच में 11 नवंबर, सोमवार का दिन है, जिसके बाद 12 नवंबर को गुरु नानक जंयती का अवकाश है। इस तरह 13 नवंबर, बुधवार और उसके बाद के कार्यदिवसों पर पूरे देश की नजर है।

अगर सुप्रीम कोर्ट के फैसलों की बात करे तो सबसे पहले दिमाग में अयोध्या मामला आता है. हलाकि इस मामले की सुनवाई खत्म हो चुकी है और जस्टिस गोगोई ने काफी पहले ही कहा था कि अगर इस पर सुनवाई तय समय में पूरी हो जाती है तो वह नवंबर तक इस पर फैसला सुना सकते हैं. अयोध्या विवाद 100 सालों से ज्यादा पुराना है।

बता दें अयोध्या विवाद पर फैसला सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक बेंच सुना सकती है जिसकी अगुवाई प्रधान न्यायाधीश जस्टिस रंजन गोगोई कर रहे हैं. बता दें जस्टिस रंजन गोगोई रिटायरमेंट से पहले इन बड़े मुकदमों पर फैसला सुनाना है। जिसमे अयोध्या विवाद, शबरीमाला केस, राफेल डील केस और कोर्ट तथा सीजेआई ऑफिस के सूचना के अधिकार के दायरे में लाने का मामला।

वही इस फैसले के पीछे की संवेदनशीलत को वह लोग काफी अच्छे समझ सकते हैं जिन्होंने 90 के दशक का दौर देखा हो. पीएम मोदी भी अपने मंत्रियों से अपील कर चुके हैं कि इसको लेकर गैर जरूरी बयानबाजी न करें. वहीं राज्य सरकारें भी कानून व्यवस्था को दुरुस्त करने में जुटी हुई हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल 28 सितंबर को केरल के सबरीमाला मंदिर में 4-1 के बहुमत से फैसला सुनाते हुए मंदिर में सभी उम्र की महिलाओं को प्रवेश की इजाजत दी थी. कोर्ट ने 10 से 50 वर्ष की महिलाओं के प्रवेश पर पाबंदी को लिंग आधारित भेदभाव बताते हुए निरस्त कर दिया था. करीब 54 पुनर्विचार याचिकाएं दाखिल कर कोर्ट को इस फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग की गई है। कोर्ट ने इस पर फैसला सुरक्षित रख लिया है।

वही लोकसभा चुनाव से राफेल मुद्दे पर कांग्रेस को उस समय बड़ा झटका लगा था जब 14 दिसंबर, 2018 को सुप्रीम कोर्ट ने इस डील में कथित घोटा’ले के आरोपों पर मोदी सरकार को क्लीनचिट दी थी. लेकिन इसके बाद इस पर भी कई पुनर्विचार याचिकाएं दाखिल की गई थीं. 10 मई, 2019 को सुप्रीम कोर्ट ने इन याचिकाओं पर अपना फ़ैसला सुरक्षित रख लिया था।

जस्टिस रंजन गोगोई की अगुवाई वाली जिसमें जस्टिस एनवी रामन्ना, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस दीपक गुप्ता और जस्टिस संजीव खन्ना शामिल हैं, इस पर फैसला सुनाएंगे कि क्या सुप्रीम कोर्ट के प्रधान न्यायाधीश सूचना के अधिकार के दायरे में आते हैं या नहीं.