रिवायत है जो शख्स 3 बार दोज़ख़ की आग से पनाह माँगता है, तो दोज़ख़ की आग उसको कहती है

एक सच्चा मुसलमान अगर 2 रकात नमाज पढ़ के दिल से अपने गुनाहों की तौबा मांगता है तो अल्लाह उसके सारे गुनाह माफ कर देते हैं| कुछ इस तरह से ही एक हदीस में पेश आया है| यह एक रिवायत है जिसमे बताया गया है कि जब कोई शख्श दोज़ख से पनाह मांगता है तो उसके लिए क्या है| एक हदीस में बयान है के अनस बिन मलिक रदी अल्लाहू अन्हु से ये रिवायत मिलती है की अल्लाह के रसूल और हम सब के प्यारे नबी सलअल्लाहू अलैही वसल्लम ने एक दफह फरमाया था कि जो शख्स 3 बार सच्चे दिल से दोज़ख़ की आग से पनाह माँगता है तो दोज़ख़ की आग उस शख्श की तरफ से खुद कहती है कि या अल्लाह इस बन्दे को दोज़ख़ की आग से महफूज़ फरमा|

अल्लाहुम्मा अजिरनी मिनन नार, अल्लाहुम्मा अजिरनी मिनन नार, अल्लाहुम्मा अजिरनी मिनन नार, या अल्लाह मुझे दोज़ख की आग से मेहफूज़ फरमा| सुनन नसाई जिल्द 3, १८२२ सही| कहते हैं कि नमाज़ों की पाबंदी गुनाहों को धो देती है| इससे आपका दिल गुनाहों से धुल जाता है, ठीक वेसे ही जैसा एक गन्दा कपड़ा साबुन के इस्तेमाल से उजला और सफ़ेद चमकदार दिखाई देता है|

क़ुरआन ही अल्लाह तक पहुँचने का जरिया है, ये मान लीजिये कि एक रस्सी है जिसका एक सिरा लोहे महफ़ुज़ में, और दूसरा सिरा कुरान के ज़रिये हमारे पास है| आपको बता दें कि इसको क़ुरआन में रसूल ﷺ की इताअत को फ़र्ज़ किया गया है|

हदीस हिंदी में

लोग दुनिया में भलाई से पहले बुराई के लिए कुछ ज्यादा ही जल्दी मचा रहे हैं, हालांकि इनसे पहले मतलब (जो लोग इस रविश पर चले हैं ऐसे लोगों पर ख़ुदा के अज़ाब की इबरतनाक मिसालें गुज़र चुकी हैं| हक़ीक़त तो सिर्फ यह है कि तेरा रब लोगों की ज़्यादतियों के होने के बावजूद भी इनके साथ चश्मपोशी से काम लेता है|

और यह भी एक कड़वा सच है कि तेरा रब सख्त सज़ा देने वाला है| वो लोग जिन्होंने तुम्हारी किसी बात को मानने से इंकार कर दिया हो, कहते हैं कि “इस शख्स पर इसके रब की तरफ़ से कोई निशानी क्यों न उतरी? तुम तो सिर्फ महज़ एक ख़बर देने वाले हो, और हर क़ौम के लिए उसने एक रहनुमा को चुना है|

अल्लाह एक-एक हामिला (प्रेग्नेंट) के पेट से वाक़िफ़ है, जो कुछ उसमें पनपेगा उसे अच्छी तरह से पता है| और वह ये भी बखूबी जानता है कि उसमें जो भी कुछ कमी या बेशी होती है वो उससे भी बाख़बर रहता है| दुनिया की हर चीज़ के लिए उसके यहाँ एक मिक़दार वक़्त से पहले ही मुक़र्रर है|

वह पोशीदा है दिलों का राज़ जान्ने वाला और ज़ाहिर हर चीज़ का आलिम भी है| वह बुज़ुर्ग है, बच्चा है और हर हाल में बालातर रहने वाला है| अगर तुममें से कोई शख्स ख़ाह ज़ोर से बात करे या आहिस्ता से और जो कोई रात की तारीकी में छिपा हो वो चाहे दिन की रौशनी में चल रहा हो, या रात के अँधेरे में उसके लिए सा यकसां हैं|