अयोध्या फैसले पर सलमान खान के पिता सलीम खान ने की मुसलमा’नो से अपील कहा- 5 एकड़ जमीन पर हमारे लिए मस्जिद नहीं बल्कि…

नई दिल्ली: दिग्गज पटकथा लेखक और फिल्म निर्माता व बॉलीवुड के भाईजान सलमान खान के पिता सलीम खान ने शनिवार को अयोध्या विवाद पर आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि पैगंबर ने इस्लाम की दो खूबियां बताई है, जिसमें प्यार और क्षमा शामिल हैं। अब जब इस कहानी अयोध्या विवाद खत्म गया है तो मुसलमानो को इन दो विशेषताओं पर चलकर आगे बढ़ना चाहिए। मोहब्बत जाहिर करिए और माफ करिये। अब इस मुद्दे को फिर से मत कुरेदिये यहां से आगे बढ़िए। सलीम खान ने यह अपील मुस्लि’म समुदाय से की है।

सलीम खान ने कहा कि अयोध्या में मुस्लि’मों को दी जाने वाली पांच एकड़ जमीन पर स्कूल बनाया जाना चाहिए. सलीम खान ने कहा कि भारत के मुसलमा’नों को मस्जिद की नहीं, बल्कि स्कूल की जरूरत है. अयोध्या विवाद पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए सलीम खान ने कहा कि हमें पैगंबर सहाब के बताये हुए रस्टी पर चलना चाहिए।

वही भारतीय समाज के परिपक्व होने की बात करते हुए सलीम खान ने आईएएनएस से कहा, फैसला आने के बाद देश में जिस तरीके से शांति और सौहार्द्र कायम रही यह प्रशंसनीय है. अब इसे स्वीकार कीजिए एक पुराना विवाद खत्म हुआ. मैं तह-ए-दिल से इस फैसले का स्वागत करता हूं. मुस्लि’मों को अब इसकी चर्चा नहीं करनी चाहिए।

सलीम खान ने आगे कहा की अब मुसलमा’नो को बुनियादी समस्याओं पर चर्चा करनी चाहिए और उसे हल करने की कोशिश करनी चाहिए. मैं ऐसी चर्चा इसलिए कर रहा हूं कि हमें स्कूल और अस्पताल की बहुत जरूरत है. मेरा मन्ना है की अयोध्या में मस्जिद के लिए मिलने वाली पांच एकड़ जगह पर कॉलेज बने तो बेहतर होगा।

खान ने आगे कहा, हमें मस्जिद की जरूरत नहीं, नमाज तो हम कहीं भी पढ़ लेते है ट्रेन में, प्लेन में जमीन पर, कहीं भी पड़ी जा सकती है और हम पड़ते आ रहे है। लेकिन हमें बेहतर स्कूल की जरूरत है. जिससे अच्छी तालीम मिलेगी 22 करोड़ मुस्लिमों को, तो इस देश की बहुत सी कमियां खतम हो जाएंगी।

वही बालीवुड में कई ब्लाकबस्टर फिल्में और फार्मूला देने वाले फिल्म लेखक ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी शांति पर जोर देते हैं. उन्होंने कहा, मैं प्रधानमंत्री से सहमत हूं. आज हमें शांति की जरूरत है. हमें अपने उद्देश्य पर फोकस करने के लिए शांति चाहिए. हमें अपने भविष्य पर सोचने की जरूरत है। इसलिए मैं दोहराता हूं कि आइए हम इसे अयोध्या विवाद को द एंड कहें और एक नई शुरुआत करें।