‘सऊदी की महिलाएं’ पर्दे में हैं लेकिन बेअक्ल और किसी की कठपुतली नहीं

सऊदी अरब में बीते साल महिलाओं के अधिकारों के चलते कई ऐसे कानून उनके लिए बनाये और लागू किये गए जिस से दुनिया वालों को लगा कि अब सऊदी अरब की महिलाएं और युवतियां सारे बंधनों को तोड़कर मर्दों से आगे निकल जाना चाहती हैं| लेकिन सच में ऐसा नहीं है| एक बीबीसी के संवाददाता की एक रिपोर्ट ने लोगों की ऐसी मानसिकता को सिरे से नकार दिया| जब वहां कुछ महिलाओं और युवतियों से इस बारे में बात की गई, क्या यहां के पुरुष आपको हमेशा बंधन में जकड़े रखना चाहते हैं? उसके बाद सऊदी की महिलाओं ने कुछ ऐसे जवाब दिए जिसको पढ़ कर शायद आपको हैरानी होगी|

इससे पहले भी साल 2017 में एशिया के मध्य पूर्व के ग्लोबल फोरम में विजिट करने वाली स्थानीय महिलाओं ने भी कुछ ऐसी ही बातें बताई थीं, जो सऊदी की महिलाओं के बारे में गलत धारणा रखनेवालों के दावों को सिरे से ख़ारिज करती हैं|


राजकुमारी रीमा बिंत बंदर बिन सुल्तान Image: Google

सऊदी अरब की महिलाओं से बातचीत में पता चला कि पिछले कुछ समय में महिलाओं के लिए एक के बाद एक कानूनों में उनके लिए ढील दी गई| कई तरह के नए कानून भी इनके लिए लागू किए गए| जैसे के महिलाओं का कार ड्राइव करना या उनका अकेले बाजार जाना और अकेले ही अपना खुदका व्यापार करना|

सऊदी महिला कार ड्राइव करते हुए Image: Google

दरअसल यह सऊदी के क्रॉउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के ‘विज़न 2030’ का हिस्सा है| वे चाहते हैं कि सऊदी को दुनिया एक अलग ही नजर से देखे| सऊदी के क्रॉउन प्रिंस चाहते हैं कि दुनिया भर में सऊदी अरब का नाम एक तरक्की पसंद और उदारवादी देश के रूप में पहचाना जाए|

हालांकि सऊदी अरब की महिलाओं को वोट देने का अधिकार, 2015 में ही दे दिया गया था| और 2018 के अंत तक उन्हें सिनेमा घर में जाकर फिल्म देखने और स्टेडियम में जाकर मैच देखने की अनुमति भी दे दी गई|

साल 2019 में मिला बड़ा अधिकार

2019 में बदलते साल के साथ ही जनवरी के पहले हफ्ते में ही एक नया नियम लागू कर दिया गया है| अब सऊदी अरब का अब कोई भी पुरुष अपनी पत्नी को जानकारी दिए बिना तलाक नहीं ले सकेगा|

मतलब की अब सऊदी अरब में किसी भी पुरुष को तलाक देने से पहले अपनी पत्नी को जानकारी देनी होगी कि वो तलाक लेना चाहता है| इससे पहले कुछ इस तरह का कानून था कि कोई भी गुपचुप तरीके से सीधा तलाक दे देता था| उसमें चाहे महिला की रजामंदी हो या ना हो|

सऊदी महिला Image: Google

लेकिन अभी सऊदी अरब के कानून के हिसाब से एक महिला गार्डियनशिप सिस्टम के तहत कभी भी एक स्वतंत्र शख्सियत नहीं बन सकती| कुछ लोगों का इस तरह का मानना है कि जब तक गार्डियनशिप व्यवस्था खत्म नहीं होगी तब तक महिलाओं को समान रूप से बराबर अधिकार नहीं मिलेगा|

क्या है गार्डियनशिप सिस्टम

सऊदी अरब में गार्डियनशिप सिस्टम के अनुसार कोई भी महिला, अपने पुरुष अभिभावक की इजाजत के बगैर आधिकारिक तौर से कोई भी काम नहीं कर सकती| जैसे के उसे बैंक अकाउंट खोलना हो, शादी करना हो या कहीं विदेश यात्रा जाना हो, या फिर उसे खुद का कोई बिजनेस चालू करना हो|

इसके लिए उसे अपने किसी पुरुष रिश्तेदार की अनुमति लेना अनिवार्य है| सऊदी अरब में इस नियम के मुताबिक उसका अभिभावक पति और पिता के अलावा संबंधित महिला या युवती का भाई या फिर बेटा भी हो सकता है|

सऊदी महिलाएं मैच देखती हुयी Image: Google

ऐसा कहा जाता है कि सऊदी अरब की महिलाओं पर इस तरह की पाबंदियां इस्लामिक कानून के तहत लगाई गई हैं| हालांकि सऊदी के कुछ लोग इस दावे को सिरे से नकारते हैं| वह इसलिए क्योंकि महिलाओं में निर्णय लेने की क्षमता पुरुषों की अपेक्षा काफी कमजोर होती है|

और उन्हें कई परिस्थितियों में अच्छे बुरे का इतना अनुभव नहीं हो पाता जितना कि एक पुरुष सही तरीके से किसी काम को करने के लिए अथवा कोई फैसला लेने के लिए सक्षम होता है|