सऊदी सरकार द्वारा महिलाओं को लेकर एक और बड़ी छूट का एलान, अब पुरषों के बिना ही वे…

रियाद: सऊदी अरब महिलाओ को लेकर लगातार अपने कानूनों में ला रहा है पिछले दिनों सऊदी अरब में साठ साल बाद महिलाओँ को ड्राइविंग का अधिकार मिला था जिसका सऊदी की महिलाओ ने खुल कर स्वागत किया नियमो में बदलाव करते हुए सऊदी अरब ने अब18 वर्ष से ज्यादा उम्र की लड़कियों व महिलाओं को बिना किसी पुरुष अभिभावक के विदेश घूमने की अनुमति दे दी है।

सऊदी अरब अपनी महिला नागरिकों के प्रति गैर-इंसानी व्यवहार के कारण दुनियाभर के मानवाधिकार संगठ’नों की पाबंदियां झेल रहा था अब पश्चिम एशियाई देश महिलाओं की विदेश यात्रा को लेकर नया कानून बना चुका है जिसे इसी वर्ष लागू किये जाने की उम्मीद है। सऊदी में आज के दिन महिलाओं के लिए ऐतिहासिक है। यहां आज से लंबे संघर्ष का सुखद समापन हुआ है।

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इस नई पहल के लिए देशभर में तैयारियां चल रही हैं। जहाँ प्रशासन भी महिलाओ के लिए विशेष व्यवस्था करने में जुटा हुआ है वहीं पुलिस भी कानून व्यवस्था को सुचारू रखने के लिए महिलाओं को तमाम तरहे के नियम सिखाने की कोशिश में हैं। तेल भंडार से लबालब इस पश्चिम एशियाई देश ने यह फैसला शायद इसलिए लिया क्योंकि उसे अपनी महिला नागरिकों के प्रति व्यवहार के कारण दुनियाभर के मानवाधिकार संगठनों की पाबंदियां झेलनी पड़ रही है।

बहरहाल सऊदी अरब में महिलाओं की विदेश यात्रा को लेकर नया कानून बना चुका है जिसे इसी वर्ष लागू किए जाने की उम्मीद है। मौजूदा कानून के मुताबिक सऊदी अरब की किसी भी उम्र की महिला बिना किसी पुरुष संरक्षक के विदेश यात्रा पर नहीं जा सकती है। 21 साल के कम उम्र के पुरुषों के साथ भी यही नियम लागू है।

सऊदी अरब अपने नागरिकों की विदेश यात्रा पर पाबंदियों में ढील देने का यह प्रस्ताव उस वक्त लाया गया जब वहां के रहने वालो की संख्या में वृद्धि दर्ज की जा रही है। आंकड़े बताते हैं कि पिछले सात वर्षों में शरणार्थियों की संख्या चौगुनी हो गई है। 2012 में इनकी तादाद 195 थी जो 2017 में बढ़कर 815 तक पहुंच गई।

कब-कब हुए सुधार

हालांकि पिछले वर्ष 2018 में इसमें थोड़ी सी गिरावट आई और यह आंकड़ा 794 पर पहुंच गया। सऊदी शरणार्थियों में पुरुष और महिलाएं दोनों शामिल हैं। इससे पता चलता है कि सऊदी अरब के नागरिकों में उन्मुक्त जीवन जीने की लालसा बढ़ रही है।

धीरे-धीरे ही सही लेकिन सऊदी अरब की महिलाओं को सभी क्षेत्रों में नहीं तो कुछ मामलों में तो पुरुषों जैसे अधिकार मिलने लगे हैं। फिर भी वहां महिलाओं पर कुछ कड़ी पाबंदियां लागू हैं मसलन वे आज भी पुरुष की अनुमति के बिना विवाह नहीं कर सकतीं।