सऊदी सरकार के खिलाफ आवाज़ उठाने वाले 13 साल के बच्चे को मौ’त की सज़ा?

दोस्तों सऊदी अरब के कानून से दुनिया भर में कौन वाकिफ नहीं है. सऊदी अरब अपने सख्त’ कानून की वजह से ही पूरी दुनिया में एक खास पहचान बनाए हुए हैं. हालांकि यह बात शायद आपको नागवार गुजरे लेकिन यह सच है की एक 13 साल के बच्चे के विरोध की आवाज ने सऊदी सरकार को इतना डरा दिया कि वह उसको स ज़ा ए मौuत देने के लिए उसका इंतजार कर रहे हैं. आपको बता दें कि सऊदी में आप बंद कमरे में भी सरकार की बुराई नहीं कर सकते.

सऊदी के किसी भी नागरिक को सरकार के खिलाफ बोलने की इजाजत नहीं है. अब आपको बताते हैं इस नाबालिक बच्चे की दास्तान दरअसल मुर्तुजा नाम का यह लड़का उस समय सिर्फ 10 साल का था, हालांकी मुर्तुजा को इस उम्र में ही इतना समझ थी कि वह अपने आसपास की राजनैतिक घटनाओं की अच्छी तरह से समझ सकता था.

साल 2011 में अरब स्प्रिंग के दौरान उसने अपने दो दर्जन से भी ज्यादा दोस्तों के साथ एक साइकिल रैली निकाली और नारा बुलंद किया था ‘हमें मानव अधिकार चाहिए’ तब ही इस बच्चे की आवाज सुनकर यह अरब देश की सरकार बेचैन हो गई थी.

मुर्तुजा का उस समय प्रोटेस्ट करते हुए सबूत के तौर पर इसका वीडियो बनाया गया था, और उसके बाद इसे गिरफ्तार कर लिया गया था. अब इसकी उम्र 18 साल हो चुकी है, और इस पर मौuत का ख़@तरा  मंडरा रहा है.

आपको बता दें की मुर्तुजा नाम के इस अबोध बालक पर आरोप था कि यह सऊदी अरब के दक्षिणी शहर में अपने भाई के साथ मिलकर एक पुलिस स्टेशन पर पेट्रोल ब@म फेंक आया था. हालांकि मुर्तुजा ने इन आरोपों से इनकार कर दिया है.

उसने बताया कि पूछताछ के दौरान मुझ पर दबाव डालकर इस तरह के बयान दिलवाए गए थे. आपको बता दें कि उस समय सरकार के विरोध प्रदर्शन के दौरान इसका भाई भी मारा गया था. तब उसकी उम्र सिर्फ 11 साल थी.

दुनियाभर में मानवधिकारों के लिए आवाज उठाने वाली संस्था ने सऊदी सरकार के इस कठोर कदम का विरोध लिया था. उन्होंने चेताया कि अंतरराष्ट्रीय कानून के हिसाब से 18 साल से कम उम्र के दोषि’यों में से किसी भी अपरा@ध के लिए आप उसको मौउत की सजा नहीं दे सकते.

हालांकि इस संगठन की बात का कहें या फिर मानवाधिकारों के उल्लंघन के दर से सऊदी की सरकार ने उस दौरान इसकी सजा को ताल दिया था. लेकिन अब ये 18 साल का हो चूका है और एक बार फिर से उसी वजह से चर्चा में बना हुआ है.

जिस वक़्त मुर्तुजा को गिरफ्तार किया गया था, उस वक़्त ये महज़ 13 साल का था. लेकिन अब यह 18 साल का हो चुका है. अब इस पर स@जा ए मौAuत का ख त रा मंडरा रहा है.

मानव अधिकार संगठनों के मुताबिक सऊदी अधिकारियों ने उस लड़के को सजा-ए-मौuत दे दी है. अब उसको कब तक उसकी सजा मिलेगी इसका पता नहीं है. फिलहाल सऊदी के इस कदम का दुनिया भर में कई संगठनों द्वारा विरोध हो रहा है.

क्या एक अबोध बालक का नादानी में किया हुआ नारा लगाना किसी भी देश की सरकार को इतना सोचने पर मजबूर कर सकता है? वाकई में ये अपने आपमें ताज्जुब की बात है या फिर शायद कोई ऐसी बात है जो दुनिया वालों को पता न हो.