पुणे में फुटपाथ पर भीख मांगते मिला सावरकर का नाती, लोगों देखा तो…

भारत के महान क्रांतिकारी और हिंदू महासभा के संस्थापक विनायक दामोदर सावरकर जिन्होंने स्वतंत्रता के लिए एक एहम भूमिका निभाई थी आज उन्ही के परिवार को लेकर बड़ा सच सामने आया है| यह वही सावरकर हैं जिन्होंने हिन्दू महासभा की नींव भी राखी थी और भारत को हिन्दू राष्ट्र बनाने का सपना देखा था| आज उन्ही के परिवार यह हाल है की आप जानकार हैरान हो जायेंगे, जैसी की आज तक जिसने देखा जिसने सुना वो हो गए| बता दें कि सावरकर के नाती को लोगों ने पुणे के मंदिर के सामने भीख मांगते और फुटपाथ पर जीवन गुजारते हुए देखा|

दरअसल आपको बता दें कि ये खबर चौंका देने वाली जरूर है लेकिन यह सच है कि कुछ साल पहले जब पुणे के लोगों को पता चला कि सावरकर का उच्च शिक्षित नाती इस हाल में है तो लोग वाकई दं’ग रह गए| इसके बात फिर कई अखबारों में इस नाती की कहानी को प्रकाशित किया जिसकी वजह से वह लोगों के सामने आ सके|

जानकारी के मुताबिक़ वर्ष 2007 में हिंदुस्तान टाइम्स, इंडियन एक्सप्रेस और टाइम्स ऑफ इंडिया ने प्रफुल्ल चिपलुनकर नाम के इस नाती की दिल को झकझोर देने वाली खबर प्रकाशित की थी| जिसमे यह पता चल सका कि पुणे के सरासबाग गणपति मंदिर के पास बैठा भिकारी कोई और नहीं बल्कि सावरकर का नाती है|

दरअसल इस बात की पुष्टि ऐसे हुई की मंदिर के बाहर दो वेंडर्स ने एक ऐसा भिखारी देखा, जो अंग्रेजी के अखबार पढ़ रहा था| वो वहीं फुटपाथ पर रहता था, लोग उसे जो पैसे दे जाते थे, उससे उसका गुजारा चला करता था| इन वेंडर्स ने जब एक सामाजिक संस्था को इसकी जानकारी दी तो पता चला कि ये शख्स कोई और नहीं बल्कि सावरकर की बेटी प्रतिभा का बेटा है|

इसके बाद नाती से बातचीत करने पर पता चला कि नाती प्रफुल्ल की जिंदगी के शुरुआती साल सावरकर के साथ ही गुजरे थे| वो बचपन से पढ़ने में तेज थे और 1971 में उनका सेलेक्शन आईआईटी दिल्ली में हो गया था| वहां से उन्होंने केमिकल इंजीनियरिंग में डिग्री ली और कुछ साल बाद थाईलैंड चले गए| वहीं उन्होंने एक थाई महिला श्रीपॉर्न से शादी रचा ली जिसके बाद उनके एक बेटा हुआ| कुछ सालों बाद वो भारत लौट आए, लेकिन बेटा वहीं रह गया|

भारत लौटने के बाद प्रफुल्ल अपने रिश्तेदारों से आमतौर पर इसलिए कट गए, क्योंकि उनकी शादी को ज्यादा पसंद नहीं किया गया था| इसी दौरान वो हिमाचल में इंडो जर्मन प्रोजेक्ट पर काम करने गए, जहां एक हादसे में वो बुरी तरह जल गए| छह साल इलाज के बाद वो धन और शरीर दोनों से बुरी तरह टूट गए, लिहाजा उन्होंने पत्नी और बेटे को थाईलैंड जाने को कहा, जिससे आर्थिक स्थिति सुधरे|

इसके बाद वह अपने पुश्तैनी घर पुणे में लौटकर उन्होंने कंसल्टेंसी का काम शुरू किया, जो ज्यादा चल नहीं पायी. वर्ष 2000 में जब थाईलैंड में कार एक्सीडेंट में उन्हें बेटे और पत्नी के निधन की खबर मिली तो वो पूरे बिखर गए| इन हालातों ने उन्हें फटेहाल हालत में पहुंचा दिया जिसके चलते उन्होंने पुणे की एक सोसायटी में वॉचमैन का काम किया, फिर कुछ और छोटे-मोटे काम से गुजारा चलाने की कोशिश की|

इसके बाद उन्होंने पुणे के एक मंदिर के सामने अपना समय गुजारना शुरू कर दिया| वो वहीं फुटपाथ पर रहते, जिसके चलते उनको करीब दो साल तक भीख मांगने की स्थिति में रहना पड़ा| फिर पहचाने जाने के बाद प्रफुल्ल ने टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया कि पुणे में हमारे बहुत रिश्तेदार हैं लेकिन मैं सबसे कट चुका था| पत्नी और बेटे के निधन के बाद ना तो मेरे अंदर लाइफ का गोल था और मेरे अंदर से पैसा कमाने की इच्छा भी अब खत्म हो गई|

इन सब के चलते नाती प्रफुल्ल ने अपने नाना वीर सावरकर के बारे में बताते हुए कहा कि तात्या मुझे पढ़ाते भी थे और अभिनव भारत के बारे में बताया भी करते थे| मैं 16 साल उनके साथ रहा और अब मैं फिर अभिनव भारत को जिंदा करना चाहता हूं|

साभारः #News18InHindi