आयोध्या: सिर्फ कहानियों के सिवा हिन्दु’ओं के पास कोई सबूत नहीं- राजीव धवन

सुप्रीम कोर्ट में बाबरी मस्जिद और राम मंदिर को लेकर सुनवाई आज तक जारी है जिसके चलते पूर्व तय तारीख से एक दिन पहले 17 अक्टूबर को समाप्त होने के संकेत के बीच 37वें दिन के दौरान मुस्लि’म पक्ष ने अपने बयान देते हुए कहा कि यदि मस्जिद के लिए बाबर द्वारा इमदा’द देने के सबूत नहीं हैं, तो सिवाय कहानियों के राम मंदिर के दावेदा’रों के पास भी तो सबूत नहीं है। बता दें कि मुस्लि’म पक्ष की ओर से पेश वकील राजीव धवन ने मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई न्यायमूर्ति एस ए बोबडे न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति एस अब्दुल नजीर की संविधान पीठ के समक्ष दलील पेश की हैं|

मुस्लि’म पक्ष के वकील राजीव धवन ने कोर्ट में दलील देते हुए कहा कि उस दौर में इसका कोई सबूत हमारे पास नहीं है, लेकिन सबूत मंदिर के दावेदारों के पास भी नहीं है, सिवाय कहानियों के साथ ही उन्होंने कहा कि 1855 में एक निहं’ग वहां आया, उसने वहां गुरु गोविंद सिंह की पूजा की और निशान लगा दिया था। बाद में सारी ची’जें हटा’ई गईं। उसी दौरान रातोंरात वहां बाहर एक चबू’तरा बना दिया और पूजा करने लगे।

राजीव धवन ने कहा कि उन्होंने बाबर की इमदाद के संबं’ध में उक्त बात तब कही जब संविधान पी’ठ के सदस्य न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने पूछा कि क्या इस बात का कोई सबूत है कि बाबर ने भी मस्जिद को कोई इमदाद दी हो?

धवन ने बताया कि ब्रिटिश हुकूमत के गवर्नर जनरल और फैज़ाबाद के डिप्टी कमिश्नर ने भी पहले बाबर के फरमान के मुताबिक मस्जि’द की देखभाल और रखरखाव के लिए रेंट फ्री गांव दिए, फिर राजस्व वाले गांव दिए। आर्थिक मदद की वजह से ही दूसरे पक्ष का आज तक प्रतिकू’ल क’ब्जा नहीं हो सका।

उन्होंने बताया कि सन् 1934 में मस्जिद पर हम’ले के बाद नुकसान की भरपाई और मस्जिद की साफ सफाई के लिए मुस्लि’मों को मुआवजा भी दिया गया था। साथ ही उन्होंने अदालत से अपील की है कि शी’र्ष अदालत अनुच्छेद 142 के तहत मिली अपरिहा’र्य शक्ति’यों के तहत दोनों ही पक्षों की गतिविधि’यों को ध्यान में रखकर इस मामले का निपटा’रा करे।

धवन ने कहा कि मस्जिद पर जबर’न क’ब्जा किया गया है। लोगों को धर्म के नाम पर उकसाया गया, रथयात्रा निकाली गई और लंबित मामले में दबाव बनाया गया है। साथ ही मस्जि’द ध्व’स्त की गई और तत्काली’न मुख्यमंत्री कल्याण सिंह को अवमानना के चलते एक दिन की जे’ल भी काटनी पड़ी थी।

इसी के चलते न्यायमूर्ति बोबडे ने पूछा कि क्या मस्जिद दैवीय है? इस पर वकील धवन ने जवाब दिया कि यह हमेशा से ही दैवीय रहती है। न्यायालय ने फिर पूछा कि क्या यह अल्लाह को समर्पित होती है? वकील धवन ने जवाब दिया कि हम दिन में पांच बार नमाज पढ़ते हैं, अल्लाह का नाम लेते हैं तो यह अल्लाह को समर्पि’त ही है।

जानकारी के लिए बता दें कि मुस्लि’म पक्ष के वकील राजीव धवन ने कहा कि कोई भी अयोध्या को राम के जन्म स्थान के रूप में मना नहीं कर रहा है। यह विवाद बहुत पहले ही सुलझ गया होता अगर यह स्वीकार कर लिया जाता कि राम केंद्रीय गुंबद के नीचे पैदा नहीं हुए थे। वहीँ दूसरी ओर हिंदुओं ने जोर देकर कहा है कि राम केंद्रीय गुंबद के नीचे पैदा हुए थे, सटीक जन्म स्थान ही इस पूरे मामले का मूल है।