तो इस वजह से ‘अली सोहराब’ (काकावाणी) को गिरफ़्तार किया गया, जानिए पूरा मामला

आज के इंटरनेट के दौर में सोशल मीडिया का बोलबाला है. जब भी हमें कोई बात अच्छी लगती है या बुरी लगती है तो हम सोशल मीडिया के जरिए अपने दोस्तों तक अपनी बात शब्दों के जरिए या फोटो के जरिए लोगों तक पहुंचाते हैं. अगर सिस्टम के खिला’फ भी अपनी आवाज़ उठानी हो तो आज के दौर में ‘सोशल मीडिया’ से बेहतर कोई जरिया नहीं है. इसके ज़रिये आम आदमी भी अपनी बात दुनिया के सामने रख सकता है.

बिकाऊ टीवी चैनलों और बिके हुए दलाल पत्रकारों से क्षुब्द आकर कुछ सोशल एक्टिविस्ट हैं जो सरकार की नीतियों और उनके काले कारनामों को देश की जनता के सामने उजागर करने का काम कर रहे हैं. जिनमें से एक हैं ‘अली सोहराब’ जो सोशल मीडिया पर ‘काकावाणी’ के नाम से जाने जाते हैं. अगर आप एक सोशल मीडिया यूज़र हैं तो फेसबुक या व्हाट्सअप्प पर आपको इनकी कोई न कोई पोस्ट या ट्वीट का स्क्रीनशॉट ज़रूर दिखाई दिया होगा.

Ali Sohrab Ko Giraftar Kiya Gaya

सोशल मीडिया पर सिस्टम के आलोचक ‘अली सोहराब’ को उत्तर प्रदेश पुलिस ने दिल्ली पुलिस के सहयोग से गिरफ्तार किया है. बताया जा रहा है कि अली सोहराब ने ‘तिवारी हत्याकां’ड और बाबरी मस्जिद-राम जन्मभूमि के फैसले पर अपनी प्रतिक्रिया दी थीं, जिनके चलते इनके खिला’फ़ एफआईआर दर्ज की गयी थी.

अली सोहराब के खिला’फ़ लखनऊ के हजरतगंज थाने में एफआईआर दर्ज की गई थी. इसके बाद लखनऊ की साइबर सेल ने अली सोहराब के फेसबुक अकाउंट को खंगाला और उसकी लोकेशन का पता किया तो, उसकी लोकेशन दिल्ली में मिलने के बाद उत्तर प्रदेश की पुलिस तुरंत हरकत में आई और दिल्ली पुलिस के सहयोग से उन्हें गिरफ्तार किया गया.

Ali Sohrab

गिरफ्तार करने के बाद उन्हें ‘नंद नगरी’ थाने ले जाया गया, जिसके बाद कुछ खाना पूर्ती करके उनको लखनऊ थाना हजरतगंज लाया गया. सोशल मीडिया में इस बात का पता चलते ही ट्विटर पर उनकी रिहाई के लिए हैश टैग ‘ReleaseAlisohrab’ चलाया गया, जो देखते ही देखते नंबर1. पर ट्रेंड करने लगा. उनके समर्थन में लोगों ने अब तक एक लाख 45 हज़ार से भी ज़्यादा तवीत किये.

अली सोहराब पर चार विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है, जिसमें 295a, 295बी, 66a, 67a आईटी एक्ट की धाराओं के तहत इन पर केस दर्ज किया गया है. आपकी जानकारी के लिए बता दें कि सोशल मीडिया पर अली सोहराब काफी एक्टिव रहते हैं, और सरकार और म’रे हुए सिस्टम की पोल खोलने में कोई कसर बाकी नहीं रखते.

‘काकावाणी’ के नाम से ख्याति प्राप्त अली सोहराब पहले फेसबुक पर एक्टिव रहते थे, लेकिन फेसबुक द्वारा उनकी आईडी और फेसबुक पेज बंद किये जाने के बाद वे सोशल माइक्रो ब्लॉग्गिंग साईट ट्विटर पर आ गए और फिर ट्वीट के ज़रिये अपनी बात रखते.

देश में चल रही बेरोजगारी, गरीबी, अशिक्षा और अन्याय के विरुध्द या सरकार की नीतियों के विरुद्ध अपनी आवाज बुलंद करना अब शायद जु’र्म माना जाने लगा है, यही वजह है कि बीते पिछले कुछ महीनों में अली सोहराब जैसे और भी कई लोगों को जेल की हवा खिलाई गयी या उनको धम’काया गया.

पोस्ट लिखे जाने तक इनको ज़मानत नहीं मिल पाई है, और उनके मिलने वाले दोस्तों, वकीलों की टीम थाणे से FIR लेने की कोशिश में लगी है और वह इस संबंद में अधिकारियों से बातचीत कर रहे हैं. इससे पहले भी फेसबुक या ट्विटर पर तमाम लोगों द्वारा सरकार की नीतियों पर सवाल करने वाले कई लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया, क्या इस तरह से भविष्य में कोई आवाज नहीं उठेगी?