मौलाना अरशद मदनी का सोनिया गाँधी के नाम वायरल लेटर का सच आया सामने, जानिए क्या है इसकी सच्चाई?

नई दिल्लीः जमीयत उलेमा ए हिंद (jamiat ulema e hind ) के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी का कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के नाम एक लेटर पेड़ सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। जिसमें मौलाना अरशद मदनी ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से अपील कर रहे है की वे महाराष्ट्र में शिवसेना के साथ मिलकर सरकार न बनाएं। हलाकि सोशल मीडिया पर वायरल हुए लेटर का जमीयत उलेमा ए हिंद की तरफ से एक फर्जी प्रॉ’पगैं’डा बताया गया हैं।

दरअसल 18 नवंबर से सोशल मीडिया एक लेटर जमकर वायरल हो रहा है। जिसमे जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनीके ह्स्ताक्षर है। और जिसमे कहा गया है की मौलाना अरशद मदनी की तरफ से अध्यक्ष सोनिया गांधी से अपील की है कि महाराष्ट्र में शिवसेना की मदद न करें। इससे कांग्रेस पार्टी पर बुरा असर पड़ेगा। हलाकि जमीयत उलमा-ए-हिंद की तरफ से इस चिट्ठी का खंडन भी किया गया है।

जमीयत ने कहा है वायरल हो रही चिट्ठी को पूरी तरह फर्जी करार दिया है। जमीयत उलमा-ए-हिंद ने एक बयान जारी करके कहा कि यह चिट्ठी फर्जी है और जमीयत उलमा-ए-हिंद के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी के नाम से कोई भी लेटर जारी नहीं किया गया और अगर होता है तो उसमें मौलाना अरशद मदनी लिखा जाता है यानि राष्ट्रीय अध्यक्ष का पूरा नाम लिखा जाता है।

जबकि वायरल हो रहे इस लेटर में सिर्फ अरशद मदनी लिखा है हुआ है। जमीयत उलमा-ए-हिंद की तरफ से जारी बयान मे कहा गया है कि जमीयत किसी भी पार्टी को राजनैतिक ख़त नहीं लिखती। वही मौलाना अरशद मदनी ने कहा कि हम फैसले के खिलाफ रिव्यू पिटीशन (पुनर्विचार या समीक्षा याचिका) दायर करेंगे. साथ ही उन्होंने कहा कि हमें मालूम है रिव्यू पिटीशन का हाल क्या होना है, लेकिन फिर भी हमारा यह हक है।

अयोध्या फैसले पर बोलते हुए मौलाना अरशद मदनी ने कहा कि हम न मस्जिद को दे सकते हैं और न ही उसकी जगह कोई जमीन ले सकते हैं. मुकदमे में हमें हमारा हक नहीं दिया गया. मामले में जमीयत उलेमा-ए-हिन्द रिव्यू पिटीशन दाखिल करेंगे।

वही इस मामले पर ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की बैठक पर बाबरी मस्जिद मामले में पक्षकार रहे इकबाल अंसारी ने कहा है कि इस मसले को यहीं पर खत्म कर दिया जाए।