रिवायत है हुज़ूर (स.अ.व.) फ़रमाते हैं जब सुबह हो तो ये दुआ पढ़ा करें… जिससे सारे दिन की !

यकीनन इस्लाम ही एक ऐसा धर्म है जिसकी इल्म की ताक़त से आप इस दुनिया की किसी भी मुसीबत का सामना कर सकते हो| कुरआन और हदीसों में मुस्लिम समाज के लोगों के लिए ऐसी तमाम दुआ और आयतें हैं जिनकी मदद से आपके बिगड़े काम बनते चले जायेंगे|

इस पोस्ट में आज आपको ऐसी ही एक दुआ के बारे में बता रहे हैं| अगर दिल में खुदा के लिए कोई जगह हो तो अपने किसी भी दोस्त या सोशल मीडिया के ज़रिये दुसरे तमाम लोगों तक इसको शेयर करना मत भूलना|

अब्दुल रहमान रदी अल्लाहू अन्हु अपने वालिद से रिवायत करते हैं की रसूल-अल्लाह सल-अल्लाहू अलैही वसल्लम हमको सिखाया करते थे की जब सुबह हो तो ये कहा करो.

أَصْبَحْنَا عَلَى فِطْرَةِ الْإِسْلَامِ وَعَلَى كَلِمَةِ الْإِخْلَاصِ وَعَلَى دِينِ نَبِيِّنَا مُحَمَّدٍ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَعَلَى مِلَّةِ أَبِينَا إِبْرَاهِيمَ حَنِيفًا مُسْلِمًا وَمَا كَانَ مِنْ الْمُشْرِكِينَ

असबहना आला फ़ितरतिल इस्लाम , वा आला कालिमतिल इख्लास वा आला दीनी नबीयीना मुहम्मदीन सल-अल्लाहू अलैही वसल्लम वा आला मिल्लती अबीयीना इब्राहिमा हनीफन मुस्लीमन वामा काना मीनल मुशरीकिन|

हमने फ़ितरत ए इस्लाम पर और कलमा ए इख्लास पर, और अपने नबी मुहम्मद सल-अल्लाहू अलैही वसल्लम के दीन पर और अपने वालिद इब्राहिम अलैही सलाम जो मुसलमान थे और मुशरिकों में से ना थे की मिल्लत पर सुबह की. तबरानी – 293-सही, मसनद अहमद 14938-सही, आस-सिलसिला सहिहा , 2905

Abdul Rahman Radi Allahu anhu apne walid se rivayat karte hain ki Rasool-Allah Sal-Allahu Alaihi Wasallam humko sikhaya karte they ki jab subah ho to ye kaha karo

أَصْبَحْنَا عَلَى فِطْرَةِ الْإِسْلَامِ وَعَلَى كَلِمَةِ الْإِخْلَاصِ وَعَلَى دِينِ نَبِيِّنَا مُحَمَّدٍ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَعَلَى مِلَّةِ أَبِينَا إِبْرَاهِيمَ حَنِيفًا مُسْلِمًا وَمَا كَانَ مِنْ الْمُشْرِكِينَ

Asbahna Ala Fitratil Islam , Wa Ala kalimatil ikhlas Wa Ala deeni Nabeeyeena MUhammadin Sal-Allahu Alaihi Wasallam Wa Ala Millati abeena Ibrahima Haneefan Musliman, Wama kana minal mushrikeen.

Humne Fitrat e islam par aur Kalma e Ikhlas par, aur apne Nabee Muhammed Sal-Allahu Alaihi Wasallam ke deen par aur apne walid Ibrahim Alaihi Salam jo musalman they aur mushriko mein se na they ki millat par Subah ki. At Tabrani – 293-Sahih, Masnad Ahmed 14938-Sahih, As-SilSila As-Sahiha , 2905

عبداللہ بن عبدالرحمن بن ابزٰی اپنے والد سے بیان کرتے ہیں کہ رسول الله صلی اللہ علیہ وسلم (ہمیں سکھایا کرتے تھے)کہ جب(ہم میں سے کوئی شخص)صبح کرے تو وہ کہے

أَصْبَحْنَا عَلَى فِطْرَةِ الْإِسْلَامِ وَعَلَى كَلِمَةِ الْإِخْلَاصِ وَعَلَى دِينِ نَبِيِّنَا مُحَمَّدٍ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَعَلَى مِلَّةِ أَبِينَا إِبْرَاهِيمَ حَنِيفًا مُسْلِمًا وَمَا كَانَ مِنْ الْمُشْرِكِينَ

ہم نے اسلام کی فطرت پر اورکلمہ اخلاص پراپنے نبی محمد ‌صلی اللہ علیہ وسلم ‌کے دین پراور اپنے والد ابراہیم علیہ السلام جو مسلمان تھےاور مشرکوں میں سے نہ تھے، کی ملت پر صبح کی۔ الطبراني في الدعاء ٢٩٣ مسند احمد ١٤٩٣٨-صحیح
سلسلہ صحیحہ ٢٩٠٥