विडीयो: बाबरी मस्जिद पर फैसले के बाद, सैयद मौलाना अरशद मदनी का बड़ा बयान

बीते शनिवार देश का सबसे बड़ा फैसला बाबरी मस्जिद और राम जन्मभूमि को लेकर आया, इसके बाद से ही तमाम सोशल मीडिया से लेकर इलेक्ट्रॉनिक और प्रिंट मीडिया में अनेकों बुद्धिजीवियों के इस फैसले को लेकर अपने-अपने तर्क आ रहे हैं. अभी हाल ही में बाबरी मस्जिद और राम्जन्भूमि पर फैसले के बाद, पहली बार जमीअत उलमा हिंद प्रमुख मौलाना अरशद मदनी का बयान आया है.

एमएमसी न्यूज़ के एंकर ने उनसे पूछा, आप इस फैसले को किस तरह से देखते हैं?, तब मौलाना अरशद मदनी साहब ने जवाब दिया हम उसकी कोई ताबीर नहीं कर पा रहे हैं. यह फैसला हमारी समझ से बाहर है. क्योंकि जो उसके अंदर बुनियाद कायम की गई है वह मुसलमा’नों के हक में है, लेकिन जो आखिरी फैसला आया है वह मुसलमा’नों के खिला’फ है.

Moulana Arshad Madani

वे आगे बताते हैं कि सुप्रीम कोर्ट ने खुद माना है, कि इस बात के कोई भी सबूत नहीं है कि मंदिर को तोड़ कर मस्जि’द बनाई गई. और यह भी माना कि 1992 में मस्जि’द को तोड़कर कारसेव’कों ने गलत किया. सारे सुबूत मुसलमा’नों के हक में होने के बावजूद भी फैसला ऐसा कैसे आया कि हम समझ नहीं पा रहे हैं.

सैयद मौलाना अरशद मदनी ने कहा कि हम सुप्रीम कोर्ट के फैसले का एहतराम करते हैं. इसके बाद एमएमसी न्यूज के एंकर ने मौलाना अरशद मदनी साहब से सवाल किया कि जो 5 एकड़ जमीन दी जा रही है, उसको लेकर क्या कहना चाहेंगे?.

उसके बाद मौलाना अरशद मदनी ने जवाब दिया, अगर देखा जाए तो उस 5 एकड़ जमीन की कोई हैसियत नहीं है. हमारा मसला सिर्फ उसी गुंबद वाली जगह का था. मस्जिद हमारा मजहब है, हमारी दुनिया नहीं है. देश का एक-एक  मुसलमान 5 तो क्या 50 एकड़ जमीन देने की हैसियत रखता है.

इसके अलावा वह अल्लाह का शुक्र अदा करते हैं, कि इतना सब कुछ हो जाने के बावजूद भी देश के मुसलमा’नों ने कितना सब्र रखा. कहीं कोई लड़ा’ई झग’ड़ा नहीं हुआ. आखरी में भी उन्होंने यह बात दोहराई कि यह फैसला हमारी समझ से बाहर है, लेकिन हम सुप्रीम कोर्ट के फैसले का एहतराम करते हैं.

आपको बता दें कि इससे पहले भी के बुद्धिजीवियों के फैसले को लेकर बयान आ चुके हैं. और इस फैसले पर कोई ना कोई सवाल खड़े कर रहा है, की आस्था पर आधारित फैसला क्या सही होगा इसके बाद मुस्लि’म सु’न्नी पक्ष इस फैसले के खिला’फ दोबारा से सुनवाई की याचिका दायर करता है या नहीं, और जो 5 एकड़ जमीन दी जाने वाली है वह उसको लेंगे अथवा नहीं अभी इन सब के बारे में भी विचार होना बाकी है.