तेल मिलने से पहले सऊदी अरब में लोगों का जीवन कैसा था, बेहद दिलचस्प जानकारी

सऊदी अरब वर्तमान में दुनिया के सबसे अमीर देशों में से एक हैं. सऊदी अरब के पास विशाल तेल भंडार है जिसे बेचकर वह मोटी रकम कमाता है. लेकिन क्या आप जानते है कि एक समय ऐसा भी था जब सऊदी अरब गरीब देशों की लिस्ट में गिना जाता था. सऊदी अरब में वर्ष 1938 में तेल के भंडार मिले थे. इससे पहले यहां का जीवन काफी अलग था.

सऊदी अरब 1932 में अपनी स्थापना के बाद से ही दुनिया के सबसे गरीब देशों की लिस्ट में शामिल रहा था. उस दौर में सऊदी की अर्थव्यवस्था पूरी तरह से कृषि पर ही निर्भर थी. कोई कार, बिजली, सड़क, बुनियादी ढांचे, हॉस्पिटल कुछ भी नहीं था.

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अधिकांश सऊदी बेडौइन थे और कम पढ़े लिखे थे. हालात यह थे कि यहां के लोग जिंदा रहने के लिए भी कच्चे भोजन पर डिपेंड रहते थे.

लेकिन 1938 में तेल की खोज के बाद सऊदी अरब की आर्थिक स्थिति काफी अच्छी हो गई और उसने इंटरनेशनल स्तर पर इसका राजनीतिक लाभ उठाया.

साल 1976 तक सऊदी अरब दुनिया का सबसे बड़ा तेल निर्माणक बन चूका था. उस दौरान सऊदी अरब में आर्थिक स्थिति और सामाजिक विकास तीव्र गति से होने लगा और समय के साथ यहां एजुकेशन भी काफी मजबूत हो गई.

यहां कम से कम भोजन, पानी और बुनियादी सुविधाओं की अनुपस्थिति के चलते बंजर रेगिस्तान था.

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जिससे मिलने वाले खजूर, मोती, सीप के गोले के बदले में हिंदुस्तान से आयतित वस्त्र और भोजन लेते थे. इंडियन करेंसी और डाक टिकटों का इस्तेमाल भी किया गया था.

इसे और अधिक स्पष्ट करने के लिए ना सिर्फ सऊदी अरब बल्कि अरबी प्रायद्वीप जिसमें सऊदी, कुवैत, बहरीन, ओमान और यमन भी शामिल था.

कतर को एक ही स्थिति वाले लैंड मांस का हिस्सा कहा जाता था. वहीं यमन में कोई तेल नहीं है. तेल की खोज में पूरे इन्वायरमेंट को परिवर्तित कर लिया.

साभार- आजतक