RBI का खजाना मोदी सरकार को ट्रांसफर, कई पूर्व गवर्नर और डिप्टी गवर्नर दे चुके हैं चेतावनी

देश की आर्थिक मंदी को देखते हुए रिजर्व बैंक ने विमल जालान समिति की सिफारिशों को अमल में लिया जिसके चलते सोमबार को रिकार्ड 1.76 लाख करोड़ रुपये का लाभांश और कैश रिजर्व मोदी सरकार को ट्रांसफर करने का फैसला किया गया है| जानकारों के मुताबिक़ इससे देश में चल रही आर्थिक मंदी को स्थिर करने में मदद मिलेगी पर क्या वाकई ऐसा हो सकता है? बता दें कि इस मामले को लेकर रिज़र्व बैंक के कई सारे बड़े अधिकारी ऐसा न करने और पैसा ट्रांसफर न करने की चेतावनी दे चुके हैं|

आपको बता दें कि यह मुद्दा काफी वक्त से वित्त मंत्रालय और केंद्रीय बैंक के बीच चल रहा था जिसको अब रिज़र्व बैंक के बर्तमान गवर्नर ने मंजूर कर यह फैसला लिया है कि बैंक का सारा पैसा लग-भाग 1.76 लाख करोड़ रूपए मोदी सरकार को ट्रांसफर किये जायेंगे| मीडिया के मुताबिक़ यह पता चला है कि इससे पहले आरबीबआई के अतिरिक्त फंड का सरकार को ट्रांसफर करने के विचार का पूर्व गर्वनर डी सुब्बाराव और वाईवी रेड्डी खुलकर विरोध कर चुके हैं|

वहीँ दूसरी ओर पूर्व डिप्टी गवर्नर विरल आचार्य ने कहा कि ऐसा करना वैसा ही ‘विनाशकारी’ साबित हो सकता है, जैसा कि अर्जेंटीना में हो चुका है। विरल आचार्य ने अर्जेंटीना की मिसाल देकर यह बता दिया कि केंद्रीय बैंक के कामकाज में दखल का भारतीय अर्थव्यवस्था पर बेहद घातक असर पड़ सकता है|

बता दें कि पिछले साल अक्टूबर में विरल आचार्य ने यहां तक कहा दिया था कि सरकार टी-20 तो आरबीआई टेस्ट मैच खेल रही है उसका असली मक़सद को बैंक का पूरा पैसा हड़प करना है| इसके बाद विरल ने बताया था कि 6.6 बिलियन डॉलर की रकम अर्जेंटीना के केंद्रीय बैंक से देश के खजाने में ट्रांसफर के बाद देश का ‘सबसे बुरा संवैधानिक संकट’ उत्पन्न हुआ।

आपको बता दें कि केंद्रीय बैंक ने सोमवार को एक बयान में कहा कि गवर्नर शक्तिकांत दास की अगुवाई में रिजर्व बैंक के निदेशक मंडल ने 176051 करोड़ रुपये सरकार को ट्रांसफर करने का फैसला किया है। इसमें 2018 19 के लिए 123414 करोड़ रुपये का अधिशेष और 52637 करोड़ रुपये अतिरिक्त प्रावधान के रूप में चिन्हित किया गया है।

बता दें कि अतिरिक्त प्रावधान की यह रकम आरबीआई की आर्थिक पूंजी से संबंधित संशोधित नियमों Economic Capital Framework ईसीएफ के आधार पर निकाली गई है। वहीँ दूसरी और फरवरी में रेड्डी ने आरबीआई के खजाने पर सरकार की नजर की आलोचना करते हुए कहा था कि सरकार ने ऐसा करके उस स्थापित सिस्टम को खतरे में डाल दिया है, जिसके तहत सरकार केंद्रीय बैंक से वक्त वक्त पर अस्थाई लोन लेती थी|

रेड्डी के मुताबिक़ यह रकम भविष्य के इंश्योरेंस के तौर पर काम करती है और इसे जमा करके रखने की जरूरत है, न कि बांट दिए जाने के| अगर सरकार की बैलेंस शीट कमजोर है तो ऐसे हाल में केंद्रीय बैंक की बैलेंस शीट मजबूत होना जरूरी है।

बता दें कि इससे पहले आरबीआई के पूर्व गवर्नर उर्जित पटेल और सरकार के बीच आरबीआई में अधिशेष राशि की सीमा तय करने को लेकर बहस हो गयी थी जिसके लिए रिज़र्व बैंक ने इस मामले की तफ्तीश के लिए एक समिति का गठन किया था|

हालांकि इस समिति के गठन से पहले ही पटेल ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था| बता दें कि कई अर्थशास्त्री और एक्सपर्ट पैनल पूर्व में इस बात पर काफी बहस कर चुके हैं कि क्या आरबीआई ने खतरों को कवर करने और संकटकालीन स्थिति से निपटने के लिए जरूरत से जयादा फंड अपने पास रख रखा है?

इसके बाद पूर्व चीफ इकॉनमिक अडवाइजर अरविंद सुब्रमण्यम ने इकॉनमिक सर्वे 2016 17 में कहा था कि आरबीआई के पास रखे 4 लाख करोड़ रुपये का इस्तेमाल बैंकों को दोबारा पूंजीगत ताकत देने या दूसरे अहम कामों में हो सकता है लेकिन तत्कालीन आरबीआई गवर्नर रघुराम राजन ने इस बात का विरोध किया

साभार: #जनसत्ता