कश्मीर में पावंदियों के चलते एक तरफ फल, ड्राई फ्रूट्स का कारोबार पूरी तरह ठप्प, गहराया रोजी-रोटी का संकट

जम्मू कश्मीर से विशेष राज्या का दर्जा खत्म होने के बाद काफी वक़्त से पूरी दुनिया में कश्मीर सुर्ख़ियों में बानी हुई है विशेष राज्या का दर्जा देने वाली धारा 370 और 35 ऐ के खत्म करने के बाद लद्दाख और कश्मीर को दो केंद्र शासित घोषित कर दिया है जिसके बाद कश्मीर में कर्फ्यू लगा हुआ है जिसके कारण आम आदमी को ज़िंदगी जीना मुश्किल हो गया है। कश्मीर में चल रहे सुरक्षा माहौल के कारण करोड़ों रुपये के फल और ड्राई फ्रूट का व्यापार प्रभावित हो रहा है तो वही दूसरी तरफ पर्यटन व्यवसाय भी बुरी तरह से प्रभावित है| इस वजह से पर्यटन क्षेत्र और व्यापार से जुड़े लोगों के लिए रोज़ी रोटी का संक’ट खड़ा हो गया है।

thewire के आंकड़ों के मुताबिक कश्मीर की अखरोट उत्पादन में 91 पर्सेंट सेब में 70 पर्सेंट बादाम में 90 के साथ चेरी और केसर में भी 90 पर्सेंट हिस्सेदारी है। इनका सालाना मूल्य करीब 7000 करोड़ रुपये होता है। कश्मीर की खेती में हर साल 23.535 मीट्रिक टन पैदावार होती है। इसमें सेब चीड़ नाशपाती जैसे फलों का 20.35 लाख मीट्रिक टन योगदान होता है। वहीं सूखे फल की हिस्सेदारी 2.80 लाख मीट्रिक टन होती है।

लेकिन सुरक्षा की वजह से कश्मीर का इस साल का व्यपार ठप होता नज़र आ रहा है वहां लगी पावंदि’यों की वजह से कोई व्यापारी अपना व्यवसाय नहीं कर पा रहा है| वहां के व्यापारियों का कहना है कि लैंडलाइन कनेक्शन नहीं होने से हम अन्य राज्यों के होलसेल डीलरों से संपर्क नहीं कर पा रहे हैं और सुरक्षा संबंधी चिंताओं की वजह से कोई कश्मीर आने के लिए तैयार नहीं है। हम अपने उत्पाद औने पौने दाम पर बेचने के लिए मजबूर हैं।

वहीँ दूसरी ओर सुर’क्षा माहोल कि वजह से कश्मीर में पर्यटन क्षेत्र भी बहुत प्रभावित है| पर्यटन को कश्मीर की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है| बता दें कि श्रीनगर के एक प्रतिष्ठित होटल कारोबारी ने बताया कि अगर मौजूदा स्थिति लंबी खिंच’ती है तो नौकरियों में कटौती करनी पड़ेगी| उन्होंने कहा कि अगर स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो हमारे पास कोई और विकल्प नहीं होगा हम यह नहीं करना चाहते हैं|

कश्मीर के पर्यटन क्षेत्र में सिर्फ होटल ही नहीं बल्कि टूर ट्रैवल्स एजेंट हाउसबोट के मालिक शिकारावाला टैक्सी ऑपरेटर और टूरिस्ट गाइडों को भी नुकसान हो रहा है| वहाँ के कुछ ट्रैवल एजेंसियों ने नौकरियों में कटौती करने से बचने के लिए अपने स्टाफ के वेतन में कटौती की है|

इन सब के बाद पर्यटन विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि गुलमर्ग सोनमर्ग या पहलगाम में तकरीबन 11 हजार पंजीकृत खच्चर वाले हैं. हमारे पास तकरीबन 5000 शिकारा चलाने वाले हैं 2100 स्लेज (बर्फ पर चलने वाली गाड़ी) वाले और 1300 से ज्यादा टूरिस्ट गाइड हैं अब इन लोगों के पास कोई काम नहीं बचा है|

जानकारी के लिए बता दें कि 5 अगस्त को केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 के ज्यादातर प्रावधानों को खत्म कर दिया था और राज्य को दो केंद्र शासित क्षेत्रों जम्मू कश्मीर और लद्दाख में बांट दिया था|

जिसके बाद से वहां परिवहन फोन सेवा मोबाइल इंटरनेट सहित सभी संचार माध्यम को बं’द कर दिया गया है| इन पावंदियों के चलते जम्मू कश्मीर का व्यवसाय ठप हो गया है वहाँ के लोगों को अभी रोटी और खाने पीने तक की मुसीबत हो रही है|