सरकार का बिना तैयारी के लॉकडाउन हुआ जानलेवा, दिल्ली से चलकर मुरैना जा रहे मजदूर की भूख-प्यास से दर्दनाक मौत

हमारा देश एक रंगमंच है, जिसपर माइक लिए एक प्रधानमंत्री खड़ा है. और भोंपू की आवाज इतनी बुलंद है कि बाकी सभी आवाजें उसके सामने शुन्न पड़ जाती हैं. हाल ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दुनियाभर में कोहराम मचा रहे कोरोना वायरस को देखते हुए देशभर में 21 दिन kलॉकडाउन का ऐलान किया है। इसके पीछे का मकसद सोशल डिस्टेंसिंग को सुनिश्चित करना था।

लेकिन प्रधानमंत्री द्वारा लॉकडाउन के ऐलान के सिर्फ 3 दिन बाद ही सैकड़ो मेहनतकश मजदूर भुखमरी के मुहाने पर पहुंच गए है। सैकड़ो कामगार अपने घरों को पैदल कूच करने को मजबूर हैं। सरकार द्वारा दुकाने और विभिन्न संस्थानों को बंद करने के फैसले के बाद कई क्षेत्र के हजारों की तादाद में मजदूरों ने पलायन शुरू कर दिया है।

यह लॉकडाउन उन लोगों की जिंदगी पर सबसे ज्यादा भारी पड़ने लगा है, जो रोजगार गंवाने के बाद बड़े शहरों को छोड़कर पैदल ही घर लौट रहे हैं। आगरा में दिल को झकझोर देने वाला मामला सामने आया है।

दरअसल, लॉकडाउन में दिल्ली से पैदल चलकर मध्य प्रदेश के मुरैना जा रहे एक युवक की शनिवार सुबह भूख प्यास से सिकंदरा के कैलाश मोड़ पर हालत बिगड़ गई। सूचना पर पहुंची पुलिस उसे अस्पताल लेकर आई, लेकिन जब तक उसने दम तोड़ दिया।

इस मामले की जानकारी वरिष्ठ पत्रकार संतोष पाठक ने अपने फेसबुक पोस्ट के ज़रिए शेयर की है। उन्होंने बताया कि रणवीर दिल्ली में कमाने आए थे, लेकिन लॉकडाउन के बाद जब उनके सामने भुखमरी का संकट खड़ा हुआ तो वो दिल्ली से अपने घर मुरैना के लिए पैदल ही निकाल पड़े। बता दें कि दिल्ली से मुरैना की दूरी तकरीबन 350 किलोमीटर है।

भुखमरी से बचने के लिए रणवीर पैदल ही इतना लंबे सफर पर निकल तो पड़े लेकिन वो अपने घर तक नहीं पहुंच सके। रास्ते की थकन और भूख प्यास से उसकी मौत हो गई।

आपको बता दें मृतक रघुवीर पुत्र राम लाल (40) निवासी गांव बरफड़ा, मुरैना का रहने वाला था। दिल्ली के तुगलकाबाद में एक रेस्टोरेंट में काम करता था। यह रेस्टोरेंट्स फूड सर्विस से जुड़ा हुआ है। रघुवीर डिलीवरी ब्वॉय का काम करता था। लॉकडाउन के बाद वह अपने घर लौट रहा था।