VIDEO: मक्का की ग्रैंड मस्जिद अल हरम में पढ़ी गयी रमजान की पहली ‘नमाज़-ए-तरावीह’, रो-रोकर अल्लाह से मांगी माफ़ी

इस वक्त कोरोना के चलते सारी दुनिया अपने-अपने घरों में बंद है. कोरोनावायरस की वजह से दुनिया भर का जनजीवन पूरी तरह से ठप हो गया है, और सभी लोग बहुत ही एतीहाद के साथ अपने-अपने घरों से बाहर निकल रहे हैं. खाड़ी देशों में भी इसका व्यापक असर देखने को मिल रहा है.

खाड़ी देश भी इससे अछूते नही रहे, वहां भी लॉक डाउन लागू किया गया, यहाँ तक की सभी मस्जिदों में नमाज़ अदा करना भी बंद करवा दिया गया था. गुरुवार (जुमेरात) की शाम को, रमज़ान का चाँद नज़र आने के खाड़ी देशों में ख़ुशी की लहर दौड़ गयी. क्यूँकी यही एक ऐसा महीना है, जिसका सारी दुनिया के मोमीन बेसब्री से इंतज़ार करते हैं.

सऊदी अरब में भी चाँद नज़र आने के बाद, मक्का और मदीना की मस्जिदों में तरावीह की नमाज़ अदा की गयी. इस दौरान मस्जिद के मौलवियों, सुरक्षाकर्मियों, और सफाईकर्मिय नमाज़-ए-तरावीह में मौजूद रहे, सऊदी अरब में दो मस्जिदों को कोरोनोवायरस के प्रतिबंध के चलते आम जनता के लिए बंद कर दिया गया है.

मक्का की ग्रैंड मस्जिद अल हरम में नमाज़-ए-तरावीह’ की नमाज के बाद अल्लाह तआला से सभी नमाजियों ने मुल्क और दुनिया भर के लोगों के लिए रो-रोकर अल्लाह से मांगी माफ़ी और दुआ की.

इमाम और नमाजियों ने दुनिया को जल्द से जल्द इस बबा से शिफा के लिए भी दुआ की. नमाजियों के दुआ मांगते वक्त उनके बोल कुछ इस तरह से थे, ‘या अल्लाह इस महामा’री को दूर कर हमें माफ कीजिए और इस माहे रमजान के पाक महीने में हमारी नमाज़ों और हमारी दुआओं को कुबूल फरमा.

आपको बता दें कि सऊदी अरब में भी लॉक डाउन के चलते वहां की पूरी मस्जिदों में, नमाज पर पाबंदी लगा दी थी. खाड़ी देशों में सबसे पहले सऊदी अरब ने ये कदम उठाया था, जिसके बाद दूसरी जगहों पर भी लोगों को घरों में ही नमाज़ अदा करने को कहा गया. बकौल इस्लाम भी कहा गया है कि, जहां बवा हो या तुम्हारी जा’न को खत’रा हो वहां से दूर हो जाएं.

मस्जिद अल हरम में तरावीह की नमाज के दौरान, ज्यादा लोग नहीं थे. जिस तरह से आम दिनों में वहां पब्लिक होती है. जुमेरात की शाम को ही खबर मिल गयी थी कि शाम को जैसे ही चांद देखने की खबर मिलेगी, तो मस्जिद में नमाज अदा की जाएगी.