इंटरनेशनल मीडिया में भारत सरकार पर मुस्लि'म विरोधी होने का ठप्पा, केंद्र के लिए बना मुसीबत

इंटरनेशनल मीडिया में भारत सरकार पर मुस्लि’म विरोधी होने का ठप्पा, केंद्र के लिए बना मुसीबत

अंतरराष्ट्रीय मीडिया में देश में हो रही कुछ घट’नाओं को लेकर काफी चर्चा है. अमर उजाला के अनुसार भारत सरकार पर विदेशी मीडिया ने आरो’प लगाया है कि वो भारत में एक तरह से मुस्लि’म विरोधी एजेंडा चला रहे हैं. इस विदेशी मीडिया में न्यूयॉर्क टाइम्स जैसे बड़े मीडिया हाउस भी शामिल हैं, जिनको लगता है कि भारत सरकार देश में एक तरह से मुस्लिम विरोधी अभियान को चला रही है.

अमर उजाला के मुताबिक इस समय विदेश मंत्रालय को इस मुद्दे को लेकर पसीने छूट रहे हैं, अभी हाल ही में राम जन्मभूमि और बाबरी मस्जिद को लेकर जो फैसला आया है, उसको लेकर  विदेश मंत्रालय को दर्जनों देशों को सफाई देनी पड़ी है.

जिनमें संयुक्त राष्ट्र के भी कुछ देश शामिल हैं, जैसे के अमेरिका, जर्मनी, चीन, ब्रिटेन, रूस और फ्रांस. विदेश मंत्रालय ने इन देशों को सफाई दी है कि राम्जन्भूमि और बाबरी मस्जिद मुकदमे में, सुनवाई के दौरान हर पक्ष को अपनी बात रखने का पूरा अवसर दिया गया है.

इसके अलावा ये भी कि भारतीय न्याय व्यवस्था के तथ्यों के आधार पर, न्याय संगत फैसला दिया गया है. इंटरनेशनल मीडिया इस फैसले के ऊपर यह भी जानने की इच्छुक है कि जब कौर्ट ने बाबरी मस्जि’द को गिराय जाने को भी गलत माना है, तो इस संबंध में उसमें जो लोग दो’षी रहे हैं उनको स’जा दिलाने के लिए अब तक क्या कार्यवाही हुई.

कुल मिलाकर अभी भी 1992 वाला मुद्दा चर्चा में है, इधर पाकिस्तान मलेशिया चीन और तुर्की जैसे देशों को छोड़कर बाकी सभी देशों का मानना है कि धारा 370 को हटाना भारत का आंतरिक मामला है, और उसमें दखल नहीं देना चाहिए.

इसके अलावा अमेरिकी कांग्रेस के वो सदस्य जो भारत सरकार को उनके मुश्किल वक्त में साथ देते थे, अब तो वह भी मानव अधिकारों को लेकर सवाल खड़े करने लगे हैं. यह पोस्ट अमर उजाला डॉट कॉम हिंदी न्यूज़ वेबसाइट से ली गई है.

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