नुसरत जहां को मिला इंसाफ, 16 लोगों को मिली स’ज़ा-ए-मौ’त- अभियोजक बोले हमारे यहां कानून का राज है

19 वर्षीय छात्रा नुसरत जहां की रूह को अब जाकर चैन मिला होगा, क्योंकि बांग्लादेशी युवती नुसरत जहां रफी ने जो काम किया उसे करने की हिम्मत बहुत कम लोग कर पाते हैं. फिलहाल 16 लोगों को सजा-ए-मौ’त दी गई है इस घट’ना ने पूरे बांग्लादेश को झकझोर कर रख दिया था. और तमाम बांग्लादेश में व्यापक प्रदर्शन भी हुए थे. बांग्लादेश के इतिहास में इस तरह की घट’ना पहली बार हुयी थी.

दोस्तों बांग्लादेश की रहने वाली नुसरत जहां रफी ने, एक मदरसे के मौलाना के खिलाफ यौ’न उत्पीड़’न की शिकायत की थी. इसके बाद कुछ लोगों ने नुसरत जहां पर दबाव बनाना शुरू कर दिया था, कि उसको शिकायत वापस ले लेना चाहिए. लेकिन नुसरत जहां रफी ने अपने साथ हुए उत्पीधन की शिकायत को वापस लेने से मना कर दिया था जिसके चलते उसको केरोसिन डालकर जिंदा ज’ला दिया गया था.

अब जाकर अभियोजक अहमद ने लोगों की भीड़ के बीच अदालत में यह फैसला सुनाया. उन्होंने कहा कि बांग्लादेश में कानून का राज चलता है, और कानून अपने हाथ में लेने वालों को कोई नहीं बचा सकता. नुसरत जहां जिस जगह पर पड़ती थी, उस जगह पर लोगों की भीड़ ने उसकी छत पर ले जाकर उसको जिंदा ज’लाया था.

छत पर ले जाकर उन्होंने  नुसरत से अपनी शिकायत वापस लेने के लिए कहा था, लेकिन उसने उसी वक्त साफ इनकार कर दिया था, कि वह अपनी शिकायत को वापस नहीं लेगी. तब उसी वक्त लोगों ने उसे बांध दिया और उस पर केरोसिन डालकर आग लगा दी.

इस घटना में नुसरत जहाँ लगभग 80% ज’ल चुकी थी, और 5 दिन बाद 10 अप्रैल के दिन वो इस दुनिया से रुखसत हो गयी थी. बांग्लादेश में लोगों ने इस घटना पर तीखी प्रतिक्रिया दी, और इसको लेकर काफी धरने-प्रदर्शन भी हुए थे.  प्रदर्शनकारियों ने नुसरत के ह’त्य’रों को कड़ी से कड़ी सजा देने के लिए मांग की थी.

बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना ने भी लोगों से अपराधियों को सख्त’ स’ज़ा दिलाने का वादा किया था, आपको बता दें कि इस घ’टना के बाद बांग्लादेश ने अपने यहाँ तकरीबन 27,000 स्कूलों को यौ’न उत्पीड़’न की रोकथाम के लिए समिति बनाने का आदेश दिया था, ताकि भविष्य में किसी भी जगह इस घट’ना की पुनरावृत्ति ना हो.

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