बाबरी मस्जिद गिराने का मकसद हकीकत को मिटाकर और फिर वहां मंदिर निर्माण कर के….

राम जन्मभूमि बाबरी मस्जिद भूमि विवा’द मामला थमने का नाम नहीं ले रहा है| इसी के चलते मुस्लि’म पक्ष ने बयान दिया है कि 1992 में बाबरी मस्जिद गिरा’ने का मकसद हकीकत को मिटाकर वहां मंदिर निर्माण करना था। साथ ही मुस्लि’म पक्षकारों ने दावा किया है कि बाबरनामा के अनुवाद में कहा गया है कि बाबर ने अयोध्या में मस्जिद बनाने का आदेश दिया था। बता दें कि शुक्रवार को सुनवाई करीब सवा घंटे चली और अब अगली सुनवाई सोमवार को होगी। शुक्रवार को चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली संविधान पीठ के सक्षम 28वें दिन की सुनवाई के दौरान मुस्लि’म पक्षकारों के वकील राजीव धवन ने कहा था कि बाबरना’मा के अनुवाद वाली किताबों में दर्ज है कि बाबर ने मस्जि’द बनवाई है।

वहीँ दूसरी ओर हिं’दू पक्षकार अपनी सुविधा के अनुसार गजेटिय’र का हवा’ला दे रहे हैं। गजेटि’यर अलग अलग वक्त पर अलग नजरिये से जारी हुए है, लिहाजा सीधे नहीं कहा जा सकता है कि बाबर ने मंदिर तो’ड़कर मस्जि’द बनवाई थी।

इसी के चलते धवन ने तीन शिलालेखों का हवा’ला देते हुए कहा कि इनमें लिखा गया था कि बाबर के कमांड’र मीर बाकी ने मस्जि’द बनाई। इन शिलाले’खों पर हिंदू पक्षकारों को आ’पत्ति है| जब हिंदू पक्ष यात्रा वृतांत और गजेटिय’र की बात करते हैं तो वे इसे कैसे नकार सकते हैं। हाईकोर्ट ने इन शिलाले’खों को नकार दिया जो सही नहीं है।

अमर उजाला पर छपी खबर के मुताबिक़, मुस्लि’म पक्ष के एक और वकील जफरयाब जिला’नी का यह कहना बिल्कुल सही है कि 1855 से पहले किसी दावे को स्वीकार नहीं किया जा सकता। जस्टिस एसए बोबडे ने सवाल किया कि मस्जि’द में संस्कृ’त में लिखे शिलालेख भी हैं। इस पर धव’न ने कहा कि मस्जिद, हिंदू और मुस्लि’म मजदूरों ने मिलकर बनाई थी। संभव है कि काम खत्म होने के बाद मजदूर यादगार के तौर पर कुछ लिखकर जाते हों।

साथ ही धवन ने कहा कि 1985 में राम जन्मभूमि न्यास बनाया गया, इसके बाद बिवाद दाखिल किया गया। वर्ष 1989 से विश्व हिंदू परिषद शिला लेकर पूरे देश में घूमने लगी। देश में माहौल बनाकर 1992 में मस्जि’द ढहा दी गई। मस्जि’द गिराने का मकसद हकीकत को खत्म करना और मंदिर बनाना था।

इसके बाद उन्होंने कहा कि राम जन्मभूमि को न्यायिक व्यक्ति मानने के पीछे का मकसद यह है कि भूमि को कहीं और शिफ्ट न किया जाए और कोर्ट में दावा सही साबित किया जा सके। धवन ने कहा कि भगवान विष्णु स्वयंभू हैं और इसके सुबूत हैं।

लेकिन यहां भगवान राम के स्वयंभू होने की दलील पेश की जा रही है। दलील दी जा रही है कि भगवान राम सपने में आए थे और बताया कि उनका सही जन्मस्था’न कहां पर है। धवन ने कहा कि क्या इस पर विश्वास किया जा सकता है।