नया बिल: अब किसी आतं’की संगठन का सदस्य न होने पर भी घोषित कर सकेंगे आतं’कवादी

2019 के लोकसभा चुनाव जीतने के बाद पूर्ण बहुमत की सरकार अब, पूरी तरह से काम करने के लिए जुट गई है. संसद में लोकसभा सत्र चल रहा है और इस सत्र में 8 नए बिल पेश किए गए हैं. इन पेश किये गए बिलों में से सबसे ज्यादा सरकार द्वारा पेश किए गए एक बिल पर विरोध हो रहा है, मीडिया के अनुसार बताया गया है कि इस बिल का पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई ने भी विरोध किया था.

संसद में अगर यह बिल पास हो जाता है तो जांच और सुरक्षा एजेंसियों को इस तरह के अधिकार मिल जाएंगे कि वह किसी भी व्यक्ति को आतं’कवादी घोषित कर सकती है. चाहे उसका संबंध किसी आतं’की संगठन से हो अथवा ना हो यह जरूरी नहीं है.

इस बिल का कांग्रेस समेत अन्य विपक्षी पार्टियों ने भी जबरदस्त विरोध किया है. तमाम पार्टियों का कहना है कि यह बिल पूरी तरह से और असंवैधानिक है, और यह मानव अधिकारों का भी हनन है. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर ने भी इस बिल पर कहा कि यह सरकार द्वारा जल्दबाजी में और एक कमजोर करेगा बिल पेश किया है.

थरूर ने कहा कि यदि कोई लोन-वुल्फ आतं’की है तो सरकार के पास उसको गिरफ्तार करने के कई तरह के अधिकार हैं. ऐसे लोगों को कई तरह से डील करने के और भी तरीके हैं. मतलब की इस तरह की स्थिति से निपटने के लिए सरकार के पास पहले से ही ऐसे अधिकार हैं.

अन्य सांसद लोगों का कहना है कि अगर यह बिल पास हो जाता है, तो इसके गलत इस्तेमाल की आशंका बहुत ज्यादा बढ़ जाएगी. यह बिल भारत के संविधान के विरु’द्ध है, और इसके द्वारा किसी भी व्यक्ति के मूलभूत अधिकारों का हनन हो सकता है और ऐसा होने की संभावना ज्यादा है.