सऊदी अरब: प्रवासियों के लिए इकामा की फीस में होने जा रहा है ये बदलाव, देखें अब आपको क्या करना

सऊदी अरब में सऊदी सरकार, अब प्रवासी परिवारों के लिए, इकामा की फीस में कुछ बदलाव करने जा रही है. जिसके तहत अब सभी प्रवासियों को आने वाले साल 2020 के लिए इस नए लागू होने वाले शुल्क के हिसाब से इकामा को नवीनीकरण, यानि के रीनयू करवाना होगा. आपको बता दें कि यह इकामा शुल्क, सऊदी के परमानेंट नागरिकों को सिर्फ एक ही बार देना होता है, जबकि प्रवासियों को लिए प्रतिवर्ष.

जो लोग नहीं जानते कि इकामा क्या होता है?, उनके लिए बता दें कि जैसे भारत में आधार कार्ड या वोटर आईडी होती है ये भी ठीक उसी तरह का होता है, जो सऊदी नागरिक को उसके सऊदी वासी होने का प्रमाण देता है. जो लोग दुसरे देशों से सऊदी अरब में काम करने के लिए जाते हैं उन्हें यह इकामा हर साल के लिए नवीनीकरण करवाना पड़ता है.

Saudi Iqama

सऊदी अरब में प्रवासियों के लिए इकामा की फीस की नयी दरें

इसकी डेट निकल जाने पर अगर कोई सऊदी में ही रुकता है तो उसको घुसपेठिया मानकर सऊदी पुलिस उसको सऊदी कानून के हिसाब से गिरफ्तार कर सकती है. सऊदी में भी हर साल कई लोग बिना इकामा के पकडे जाते हैं. चलिए अब बात करते हैं इकामा की नयी फीस के बारे में.

सऊदी अरब में रहने वाले भारतीय और दूसरे देशों से आये अन्य प्रवासियों को साल 2020 के लिए नयी IQAMA Fees, 1441 रुपए भरनी होगी. इसमें एक बात और है, अगर आप या फिर आप जिस कंपनी में काम कर रहे हैं उस कंपनी में आप एक 50% से ज़्यादा की हैसियत के नागरिक हैं तो आपके इकामा की फीस 750 सऊदी रियाल होगी.

इसके बाद आपके वर्क परमिट की फीस 6,000 सऊदी रियाल होगी, और आपका स्वास्थ्य\बीमा फीस 450 रियाल होगी. इस तरह से अगर देखा जाय तो यह तीनों, मतलब इकामा+ वर्क परमिट+ स्वास्थ्य\बीमा फीस मिलाकर कुल 7200 सऊदी रियाल आपको देने होंगे. लेकिन उपर जो शर्त दी गयी है ये उसके हिसाब से हैं.

और दूसरी स्तिथि में अगर आप, आपकी कंपनी में 50% से नीचे के सऊदी नागरिक हैं तब आपको इकामा की यह रकम कुछ इस तरह से भुगतान करनी होगी. 7,200 IQAMA Fees, 7,200 Work Purmit Fees, Insurance Fee 450 रियाल, कुल रकम 8,400 रियाल आपको देने होंगे.

सऊदी अरब में काम करने वाले प्रवासीयों की मुश्किलें बढ़ रही हैं

एक वक्त था, जब सऊदी अरब दूसरे देशों के लोगों के लिए स्वर्ग जैसा था. क्योंकि तब इकामा की फीस बेहद कम थी, और गरीब या फिर कुशल कारीगर काफी खुश रहते थे, क्योंकि वहां से उनको मोटी आमदनी होती थी. लेकिन पिछले कुछ समय से स्थिति, अब इसके ठीक उलट है.

सऊदी में काम करने वालों की मुश्किलें, दिन पर दिन बढ़ती जा रही हैं. एक तो यह कि सऊदी में हर साल, सऊदी सरकार इकामा की कीमतें बढ़ा रही है, और दूसरी सबसे बड़ी बात यह है कि वहां पर हर कंपनी को एक खास संख्या में सऊदी के लोगों की भर्ती करना जरूरी होता है. इसके बाद ही वह प्रवासियों को नियुक्त कर सकते हैं. क्योंकि सऊदी सरकार का प्रथम उद्देश्य सऊदी के नागरिकों को सुविधाएं देना है.

सऊदी अरब में रहने वाले लोगों के लिए यह इक़ामा उनके कफ़ील देते हैं, सऊदी अरब में सेठजी को कफ़ील कहा जाता है. जब कोई बंदा किसी कफ़ील के यहाँ काम करने जाता है वो उसका कफ़ील यह तय करता है कि में अपने बंदे को कितने साल के लिए काम पर रख रहा हूँ, उसी हिसाब से ये क़फील खुद काम करने वालों के इक़ामा बनवाते हैं, और जब तक अपने पास उसको रखते हैं कि सामने वाला उसके यहाँ काम करता है.

हालाँकि सभी कफील ऐसे नहीं होते, कुछ ऐसे भी होते हैं जो इक़ामा बनवाने के बाद अपने बंदे के हाथ में दे देते हैं. कुल मिलकर ये एक भरोसेवाली बात है कि वो या आप एक दूसरे के प्रति कितने इमानदार हैं.