VIDEO: तीन तलाक़ बिल पर लोकसभा में हंगामा, रविशंकर और ओवैसी में तू-तू मैं-मैं

नई दिल्लीः केंद्र सरकार ने एक बार फिर बहुचर्चित तीन तलाक़ बिल को लोकसभा में पेश किया है। लोकसभा में जमकर हंगामा सुरु हो गया आपको बता दें बीजेपी ने अपने चुनावी घोषणा पत्र में भी वादा किया था कि वह तीन तलाक़ को ख़त्म करने के लिए क़ानून बनाएगी। इसी को लेकर आज कानून मंत्री ने सभा में तीन तलाक़ बिल पेश किया जिसको लेकर कांग्रेस पार्टी समेत कई विपक्षी दलों ने विरोध किया. वहीं कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद और AIMIM के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी के बीच खासी नोंक-झोंक भी हुई।

मोदी सरकार पिछली बार भी इस बिल को लेकर आई थी और तब सरकार ने विधेयक को लोकसभा में तो पास करा दिया था लेकिन कोशिश करने के बावजूद राज्यसभा में वह इसे पास नहीं करा पाए थे। बहरहाल, मोदी सरकार ने इस विधेयक को प्राथमिकता सूची में रखा है और उसकी कोशिश है कि वह इसी सत्र में इसे पास करा ले। लेकिन विपक्ष की ओर से इसे लेकर लगातार विरोध हो रहा है।

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हलाकि विपक्षी दल इस विधेयक को लेकर सवाल उठ रहा है कि आख़िर मोदी सरकार इस बिल को लेकर इतनी हड़बड़ी में क्यों है और वह क्यों इसे जल्दी से जल्दी पास कराने पर आमादा है। लोकसभा में ओवैसी ने बताया की बिल संविधान के आर्टिकल 14 और 15 का उल्लंघन करता है. उन्होंने तर्क दिया कि ट्रिपल तलाक बिल मुस्लिमों के साथ भी भेदभाव करने वाला कानून है।

ओवैसी के मुताबिक अगर कोई गैर-मुस्लिम ऐसा अपराध करता है तो उसे एक साल की ही सजा होगा. जबकि यही अपराध अगर कोई मुस्लिम पति करता है तो उसे 3 साल की सजा होगी. ओवैसी ने कहा की यह बिल महिलाओं की मदद करने की जगह उन के हितों को नुकसान पहुंचाएगा ये भेदभाव के संविधान के खिलाफ बताया।

वही इस विधेयक को लेकर एक साथ तीन तलाक़ का विरोध कर रहे तमाम संगठनों का कहना है कि वे एक साथ तीन तलाक़ के तो ख़िलाफ़ हैं लेकिन ऐसे किसी क़ानून के पक्ष में नहीं हैं, जिसमें तलाक़ देने वाले को तीन साल के लिए जेल भेजने का प्रावधान हो। एक साथ तीन तलाक़ के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाने वाली महिला संगठनों की भी इस मुद्दे पर यही राय है।

लेकिन इसके बावजूद सरकार बिल को मौजूदा स्वरूप में ही संसद में पास कराने पर अड़ी है। इसे लेकर सरकार की नीयत पर पहले से ही सवाल उठते रहे हैं।यहाँ ग़ौरतलब है कि जिन मुसलिम देशों ने एक साथ तीन तलाक़ पर पाबंदी लगाई हुई है, वहाँ भी तलाक़ देने वाले शौहर को जेल भेजने का प्रावधान नहीं है।

 

वही दूसरी बात, देश में मुसलिम समुदाय के अलावा बाक़ी समुदायों में भी तलाक़ का प्रावधान तो है लेकिन किसी भी समुदाय में तलाक़ देने वाले व्यक्ति को जेल भेजने का प्रावधान नहीं है। ऐसे में यह सवाल उठता है कि सरकार आख़िर मुसलिम समाज में ही तलाक़ देने वाले को जेल भेजने का प्रावधान क्यों करना चाहती है?

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