तीन तलाक कानून को हाई कोर्ट में चुनौती, हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर

नई दिल्ली: हाल ही में संसद के दोनों सदनों से पारित हुए ट्रिपल तलाक सम्बंधी बिल को चुनौती देते हुए दिल्ली हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दायर हो गई है। यह याचिका अधिवक्ता व सामाजिक कार्यकर्ता शाहिद अली ने दायर की है। इस जनहित याचिका में इस अधिनियम की धारा 3 और 4 को रद्द करने की मांग की गई। वही आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड भी इस बिल को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देगा। बोर्ड के प्रवक्ता और कार्यकारिणी सदस्य जफरयाब जीलानी ने कहा कि बिल की खामियों को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जाएगी।

जफरयाब जीलानी ने कहा कि बोर्ड की लीगल कमेटी की अगले एक हफ्ते के अंदर बैठक होगी। इसमें इस बिल की कानूनी खामियों का अध्ययन कर सुप्रीम कोर्ट जाएंगे। जीलानी ने कहा कि तीन तलाक को गैर कानूनी करार देने के बारे में केन्द्र सरकार द्वारा बनाये गये इस बिल में एक बार में तीन तलाक देने वाले पति को जेल भेजने का जो प्रावधान किया गया है, वह किसी भी सूरत में उचित नहीं ठहराया जा सकता।

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इन धाराओं के तहत मुस्लिम पति द्वारा अपनी पत्नी को तीन तलाक कहना अपराध है, जिसके लिए तीन साल तक की जेल और जुर्माने का प्रावधान है और अगर पति जेल चला जायेगा तो इस सूरत में पत्नी के बच्चों की भरण पोषण और परवरिश आखिर कौन करेगा?

दायर किक गई याचिका में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट ने तीन तलाक को पहले ही असंवैधानिक घोषित किया था. हालांकि बाद में केंद्र ने न केवल तीन तलाक को निरस्त और अवैध घोषित किया, बल्कि इसे दंडनी’य अपरा’ध के अंतर्ग’त भी रखा है लेकिन इस अधिनियम में पति और पत्नी के बीच सुलह कराने के लिए कोई व्यवस्था नहीं की गई है।

इस याचिका में यह भी कहा गया है कि वर्तमान अधिनियम मुसलमा’नों के साथ भेदभाव करने वाला है. इस याचिका पर हाईकोर्ट आगामी सप्ताह में सुनवाई कर सकती है।

बता दें कि मंगलवार को संसद ने मुस्लिम महिलाओं को तीन तलाक देने की प्रथा पर रोक लगाने के प्रावधान वाले एक ऐतिहासिक विधेयक को मंजूरी दे दी। विधेयक में तीन तलाक का अपरा’ध सि’द्ध होने पर संबंधित पति को तीन साल तक की जेल का प्रावधान किया गया है।

साभार: #thequnt

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