VIDEO: हिंदुत्व का मुद्दा छोड़ेगी शिवसेना? महाराष्ट्र सियासी संकट के बीच देखें ठाकरे क्या बोले

नई दिल्ली: महाराष्ट्र चली आ रही सियासी उठापठक के बीच राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन को मंजूरी दे दी है। राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने अपनी सिफारिश में कहा था राज्य में कोई भी दल सरकार बनाने की स्थिति में नहीं है इसलिए राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाया जाना चाहिए। इंडिया टीवी न्यूज़ डॉट कॉम के अनुसार, राष्ट्रपति शासन के खिलाफ शिवसेना ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है जिसमें आरोप लगाया गया है कि सरकार बनाने के लिए राज्यपाल ने उपयुक्त समय नहीं दिया है।

वही अब शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे को कांग्रेस और एनसीपी का समर्थन मिलने की स्थिति में महाराष्ट्र में अपनी पार्टी के नेतृत्व वाली सरकार का गठन करने में अपने राजनीतिक जीवन की सबसे बड़ी परीक्षा का सामना करना पड़ेगा। महाराष्ट्र के राज्यपाल ने शिवसेना को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया है।

महाराष्ट्र में चुनाव नतीजों के करीब 18 दिन बाद राज्यपाल के सिफारिश पर राष्ट्रपति शासन लगाया गया। वहीं कांग्रेस और एनसीपी के रूख के कारण शिवसेना सकते में है लेकिन इस वक्त शिवसेना के निशाने पर केवल बीजेपी है। इस बीच उद्धव ठाकरे ने इस बात के संकेत दे दिए हैं कि वो कांग्रेस और एनसीपी से गठबंधन के लिए हिंदुत्व का मुद्दा छोड़ सकते हैं।

विश्लेषक ने कहा, एक राष्ट्रीय पार्टी के साथ समझौता होगा और यह देखना होगा कि वह कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को उन्हें समर्थन देने के लिए कैसे समझा पायेंगे। क्या वह उग्र हिंदुत्व के रुख को नरम करेंगे, जिसका सहारा शिवसेना लेती है, या एक समस्या खड़ी होगी, यह तो आने वाले दिनों में ही पता चलेगा।

 

इस बीच आज एनसीपी विधायकों की अहम बैठक है जिसमें आगे की रणनीति पर विचार किया जाएगा। एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार इस बैठक में मौजूद रहेंगे। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल ये है कि क्या शिवसेना को एनसीपी और कांग्रेस का समर्थन मिलेगा या नहीं?

आपको बता दें ठाकरे के लिए एक और चुनौती यह होगी कि क्या वह मुख्यमंत्री पद स्वीकार करेंगे, हालांकि पहली बार विधायक बने उनके बेटे आदित्य को पार्टी के मुख्यमंत्री चेहरे के रूप में पेश करने के लिए कुछ क्षेत्रों में मांग उठ रही है। अगर ऐसे में किसी अन्य नेता को मुख्यमंत्री नियुक्त किया जाता है तो मतभेद हो सकते हैं।