हदीस: हुज़ूर (स.अ.व.) फरमाते हैं उस शख्स में कोई भलाई नही जो मेहमान नवाज़ी नही करता

उक़्बा बिन आमिर रदी अल्लाहू अन्हु से रिवायत है की रसूल-अल्लाह सल-अल्लाहू अलैही वसल्लम ने फरमाया उस शख्स में कोई खैर (भलाई) नही जो मेहमान नवाज़ी नही करता मसनद अहमद 17088 -सही अल-सिलसिला आस-सहिहा  193

रसूल-अल्लाह सल-अल्लाहू अलैही वसल्लम ने फरमाया जो शख्स अल्लाह और आख़िरत पर यकीन रखता हो उसको अपने मेहमान की इज्ज़त करनी चाहिए. सही बुखारी, जिल्द 7 6135

हफ्सा रदी अल्लाहु अन्हा से रिवायत हैं रसूल-अल्लाह सल्लल्लाहु अलहै वसल्लम ने फ़रमाया जिसने रोज़े की नियत फज्र से पहले नहीं कि उसका रोज़ा नहीं हुआ. सुनन अबू दाऊद , जिल्द 2, 682 सही

नोट:

1. नियत से मुराद यहा दिल के इरादे का नाम है क्यूंकी किसी भी सही हदीस से रोज़े की निय्यत की दुआ साबित नही है.

2. फ़र्ज़ रोज़े की नियत फज्र से पहले ज़रूरी है वरना रोज़ा नही होगा.

3. जो नवाफील रोज़ होते हैं उसकी नियत सूरज निकालने के बाद भी कर सकते हैं लेकिंग शर्त ये है की उसने फज्र के बाद कुछ खाया पिया ना हो और हमबिस्तरी भी ना की हो.

It Was Narrated from Hafsah Radi Allahu Anha that Rasool-Allah Sallallahu Alahai Wasallam said: Whoever did not decide to fast before Fajr then there is no fast for him. Sunan Abu Dawud, Book 13, 2448-Sahih

Note:

1.There is no dua for the intention to fast in sahi ahadith, intenion here is only from the heart.

2. For the obligatory (Farz) fasts you have to do the intention before fajr else that fasting will not be valid

3. For Nawafil fasts it is permissible to make the intention to fast on the day, if you have not eaten or drunk or had intercourse after Fajr.

 दुआ ए नूर – दिल में और बदन में नूर हासिल करने की दुआ

रसूल-अल्लाह सल-अल्लाहु अलैही वसल्लम अपनी दुआ में ये फरमाया करते थे. एह अल्लाह , मेरे दिल में नूर पैदा कर, मेरी नज़र में नूर पैदा कर मेरे कान में नूर पैदा कर मेरे दाईं तरफ नूर पैदा कर मेरी बाईं तरफ नूर पैदा कर मेरे उपर नूर पैदा कर मेरे नीचे पैदा कर और मुझे नूर आता फरमा सही बुखारी जिल्द 7, 6316

عقبہ بن عامر‌رضی اللہ عنہ سے روایت ہے کی رسول الله صلی اللہ علیہ وسلم نے فرمایا اس شخص میں کوئی خیر( بھلائی) نہیں جو مہمان نوازی نہیں کرتا
سلسلہ صحیحہ ١٩٣
مسند احمد ١٧٠٨٨-صحیح

رسول الله صلی اللہ علیہ وسلم نے فرمایا ، جو شخص اللہ اور آخرت کے دن پر ایمان رکھتا ہو اسے اپنے مہمان کی عزت کرنی چاہیئے
صحیح بخاری جلد ٧، ٦١٣٥

Uqba bin aamir radi allahu anhu se rivayat hai ki Rasool-Allah Sal-Allahu Alaihi Wasallam ne farmaya us shakhs mein koi khair (bhalayee) nahi jo mehman nawazi nahi karta
Masnad Ahmed ,17088 -Sahih Al-Silsila As-Sahiha – 193

Rasool-Allah Sal-Allahu Alaihi Wasallam ne farmaya jo shakhs Allah aur aakhirat ke din par yakeen rakhta ho usko apne memhman ki ezzat karni chahiye. Sahih Bukhari, Jild 7, 6135

रसूल-अल्लाह सलअल्लाहु अलैही वसल्लम ने फरमाया क़ुरान सिफारिश करने वाला है और इसकी सिफारिश क़ुबूल की जाती है जो शख्स इसको अपने सामने रखेगा उसको ये जन्नत की तरफ ले जाएगा और जो इसको अपनी पीठ के पीछे रख देगा उसको जहन्नम की तरफ हांक कर ले जाएगा. अल-सिलसिला-अस-साहिहा-2876