गुजरात मॉडल का नया कारनामा, कोरोना मरीजों पर वेंटिलेटर फेल, भाजपा नेता के क़रीबी की कंपनी ने दिए थे वेंटिलेटर

गुजरात मॉडल का नया कारनामा, कोरोना मरीजों पर वेंटिलेटर फेल, भाजपा नेता के क़रीबी की कंपनी ने दिए थे वेंटिलेटर

केंद्र की मोदी सरकार ने कोरोना संक्रमण से निपटने के लिए राजकोट की एक फर्म से 5,000 वेंटिलेटर खरीदने का  आदेश दिया था. लेकिन फर्म द्वारा दी गई सांस लेने संबंधी मशीनों को अहमदाबाद के सबसे बड़े कोविड-19 अस्पताल के डॉक्टरों ने मापदंडों पर खरा नहीं पाया है. गुजरात सरकार के प्रमुख स्वास्थ्य सचिव जयंती रवि द्वारा की गई जानकारी के अनुसार सरकारी संस्था एचएलएल लाइफकेयर ने 5000 वेंटिलेटर्स खरीदने का यह ऑर्डर जारी किया था.

आपको बता दें कि जिन फार्मों को यह ऑर्डर दिया गया था उसके वर्तमान और पूर्व प्रमोटरों के वरिष्ठ भाजपा नेताओं से करीबी संबंध बताए जाते हैं. इनमें से एक उद्योगपति का परिवार पीएम नरेंद्र मोदी के नाम के मोनोग्राम वाले महंगे सूट से को लेकर भी विवादों में रह चूका है यह शूट मोदी को तोहफे में मिला था.

मना जा रहा है कि वेंटिलेटर्स खरीदने के लिए राशि पीएम केयर्स फंड से दी जाने वाली हैं. इसी क्रम में ज्योति सीएनसी ऑटोमेशन लिमिटेड ने बीते कुछ हफ्तों में सौ मेड इन इंडिया वेंटीलेटर अहमदाबाद सिविल हॉस्पिटल में सप्लाई किये थे. इस फर्म के प्रमुख और मैनेजिंग डायरेक्टर पराक्रमसिंह जडेजा को सूबे के मुख्यमंत्री विजय रूपाणी का काफी करीबी बताया जाता है.

इसके कुछ समय बाद ही वेंटिलेटर धमन-1 को अस्पताल के डॉक्टरों ने कोविड-19 के मरीजों के अनुकूल नहीं पाया. अहमदाबाद मिरर की एक रिपोर्ट के अनुसार ज्योति सीएनसी सप्लाई किये गए वेंटिलेटर्स को गुजरात के सबसे बड़े अस्पताल के डॉक्टरों ने वांछित नतीजे न देने वाले घोषित करते हुए सूबे की सरकार से उचित वेंटिलेटर्स की डिमांड की थी.

दूसरी तरफ खुद सूबे के सीएम ने इस कंपनी की मशीनों को लेकर दावा किया कि ये सस्ती मशीनें सिर्फ दस दिनों में तैयार की गई हैं और इसे एक उपलब्धि के तौर पर प्रचारित किया गया. सिविल अस्पताल के एनेस्थेसिया विभाग के अध्यक्ष डॉ. शैलेश शाह ने न्यूज़ एजेंसी पीटीआई को बताया कि अब तक धमन-1 का उपयोग बेहद कम मौकों पर किया गया.

उन्होंने बताया कि हाई-एंड वेंटिलेटर्स पर्याप्त संख्या में मौजूद थे इसलिए धमन1 की आवश्यकता कम ही पड़ी. उन्होंने कहा कि धमन-1 हाई एंड वेंटिलेटर्स का अच्छा विकल्प नहीं है लेकिन बेहद इमरजेंसी के हालातों में इसका इस्तेमाल करना पड़ जाता है. शाह ने कहा कि जिस तरह से कोरोना के मरीजों की तादात बढ़ रही है हम इन पर निर्भर नहीं रह सकते हैं.

अहमदाबाद मिरर की रिपोर्ट के मुताबिक इन्हें सीएम द्वारा 5 अप्रैल को लॉन्च किया गया था तब तक इसे सिर्फ एक ही व्यक्ति  पर परिक्षण किया गया था. वहीं सबसे बड़ी और हैरान करने वाली बात यह है कि इन वेंटिलेटर्स को देश के ड्रग कंट्रोलर जनरल से लाइसेंस भी प्राप्त नहीं है.

वहीं विवादों में घिरने के बाद सरकार का दावा है कि उन्होंने कभी ज्योति सीएनसी की मशीनों को वेंटिलेटर नहीं कहा. हालांकि यह अलग बात है कि उनके द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति में इसे नौ बार वेंटिलेटर बताया गया और इसे पीएम मोदी की मेक इन इंडिया प्रोजेक्ट की एक बड़ी उपलब्धि के तौर पर पेश किया गया. वहीं कांग्रेस ने इस मामले पर जांच की मांग की हैं.

अहमदाबाद मिरर के मुताबिक कंपनी के प्रमुख और सीएमडी पराक्रमसिंह जडेजा सीएम के काफी करीबी बताए जाते हैं. इतना ही नहीं वेंटीलेटर बनाने के बाद उन्होंने बताया था कि गुजरात के सीएम उन्हें रोज कॉल करके प्रोत्साहित किया करते थे इसी के चलते उन्होंने 10 दिन में उन वेंटीलेटर को बनाया.

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