Eid al-Fitr 2019: क्यों मनाई जाती हैं ईद, कैसे हुई थी इसकी शुरुआत, जानिए ईद की पूरी कहानी

ईद उल-फ़ित्र इस्लामी कैलेण्डर के महीने शव्वाल के पहले दिन मनाया जाता है। मुसलमानों का त्योहार ईद मूल रूप से भाईचारे को बढ़ावा देने वाला त्योहार है। इस त्योहार को सभी लोग आपस में मिल जुलकर मनाते है और खुदा से अमन-चैन और सुख-शांति और बरक्कत के लिए दुआएं मांगते हैं। पूरे विश्वभर में ईद की खुशी पूरे हर्षोल्लास से मनाई जाती है। तो आइए जानते हैं भाईचारे को बढ़ावा देने वाला त्योहार ईद क्यों मनाई जाती है और इस त्योहार की शुरुआत कैसे हुई।

रमजान का महीना इस्लामिक कैलेंडर में नवां और सबसे पवित्र महीना माना गया है। इस दौरान अल्लाह की इबादत करते हैं और रोजा रखते हैं। दसवें महीने शव्वाल की पहली चांद वाली रात ईद की रात होती है। इस चांद को देखे जाने के बाद ही ईद-उल-फितर का ऐलान किया जाता है। इस ईद को मीठी ईद या फिर सेवाइयों वाली ईद भी कहते हैं। इस बार ईद का त्योहार भारत में 5 या 6 जून को मनाया जाएगा।

पाक कुरान के मुताबिक, रजमान के पाक महीने में रोजे रखने के बाद अल्लाह एक दिन अपने बंदों को बख्शीश और इनाम देता है। इसीलिए इस दिन को ईद कहते हैं और बख्शीश और इनाम के इस दिन को ईद-उल-फितर कहा जाता है। पूरे विश्व में ईद की खुशी पूरे धूमधाम से मनाई जाती है।

मुसलमान ईद में खुदा का शुक्रिया अदा इसलिए भी करते हैं कि उन्होंने महीनेभर के उपवास रखने की ताकत दी। ईद पर एक खास रकम (जकात) गरीबों और जरूरतमंदों के लिए निकाल दी जाती है। नमाज के बाद परिवार में सभी लोगों का फितरा दिया जाता है, जिसमें 2 किलो ऐसी चीज दी जाती है, जो प्रतिदिन खाने की हो।

पहली ईद उल-फित्र पैगंबर मुहम्मद ने सन् 624 ईस्वी में जंग-ए-बदर के बाद मनाया थी। पैगंबर हजरत मोहम्मद ने बद्र के युद्ध में विजय प्राप्त की थी। उनके विजयी होने की खुशी में यह त्योहार मनाया जाता है। ईद के दिन मस्जिदों में सुबह की नमाज अदा करने से पहले हर मुसलमान का फर्ज है कि वो दान या भिक्षा दे।

रमजान महीने में रोजे रखने को फर्ज करार दिया गया है। ऐसा इसलिए, ताकि इंसान को भूख-प्यास का अहसास हो सके और वह लालच से दूर होकर सही राह पर चले। रमजाने के दिन कई तरह के पकवान बनते हैं और मीठी सेवइयां एक-दूसरे को खिलाते हैं। परिवार और दोस्तों को तोहफा देते हैं।

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