VIDEO: खुलासा याकुब के आख़िरी शब्द मैं निर्दोष हु, मैं बेगुनाह हु, मुझे…

मुंबई: 1993 मुंबई ब$म धमा$कों में दोषी ठहराए गए याकूब मेमन की जीवित रहने बहुत प्रबल इच्छा थी, लेकिन आख़िरकार उसके ग़ुनाहों ने उसे जीने नहीं ही दिया और वह फां$सी पर लटका दिया गया। 12 मार्च 1993 के मुंबई सीरियल ब्ला$स्ट में दोषी ठहराए गए मेमन ने देश के सबसे बड़े वकीलों की सेवाएं ली और अपने आपको फां$सी के फंदे से बचाने की हर मुमकिन कोशिश की। यहां तक कि उसकी ओर से सुप्रीम कोर्ट महाराष्ट्र के राज्यपाल और राष्ट्रपति के पास याचिका पर याचिका दायर की गई कि लेकिन उसकी यह इच्छा पूरी नहीं हुई।

नागपुर अपने 53वें जन्मदिन के दिन फां$सी से दो घंटे पहले गुरुवार की सुबह पांच बजे तक याकूब मेमन को उम्मीद थी कि वह बच सकता है। नागपुर सेंट्रल जेल के स्टाफ के मुताबिक याकूब मेमन को क्षमादान पर भरोसा था। बुधवार दोपहर बाद याकूब से भाई सुलेमान और चचेरे भाई उस्मान ने कुछ मिनट के लिए मुलाकात की थी।

उसी शाम में सुप्रीम कोर्ट द्वारा याचिका खारिज किए जाने के बाद इन्होंने फिर मुलाकात की थी। इसके बाद दोनों भाई होटल लौट गए थे। इनके कानों में याकूब की बात गूंज रही थी। याकूब ने इनसे कहा था, की यदि वो मुझे मेरे भाई के गुनाहों के लिए सजा दे रहे हैं तो मुझे कबूल है। अगर उनको लगता है कि मैं गुनाहगार हूं और सजा दे रहे हैं तो यह गलत है। मैं बेकसूर हूं।

होटल में रात दो बजे एक कॉन्स्टेबल ने सुलेमान और उस्मान के कमरे का दरवाजा खटखटाया। उसने एक चिट्ठी सौंपी। यह चिट्ठी फांसी की आधिकारिक सूचना थी। इसमें बताया गया था कि सुबह सात बजे याकूब को फांसी दी जाएगी। नई दिल्ली में सुप्रीम कोर्ट आधी रात तक याकूब की फांसी की आखिरी याचिका पर सुनवाई करता रहा।

जेल स्टाफ ने सुप्रीम कोर्ट के आखिरी शब्द का इंतजार करते हुए सारी प्रक्रिया शुरू कर दी थी। रात में तीन बजे जेल स्टाफ याकूब के सेल में गए। इन्होंने उसे नहाने के लिए कहा। वह पहले से ही जाग रहा था। बैठकर वह इंतजार कर रहा था। जहां याकूब को फां$सी दी गई वहां जेल सूपेरिंटेंडेंट, डेप्युटी सूपेरिंटेंडेंट, असिस्टेंट सूपेरिंटेंडेंट, मेडिकल ऑफिसर और फां$सी पर चढ़ाने वाला एक शख्स मौजूद था।

जब मैजिस्ट्रेट ने याकूब से पूछा कि अब तक उसे क्या कहा गया है और क्या पता नहीं है तब वह समझ गया कि फांसी तय हो गई है। करीब चार बजे उसे खाने के लिए उपमा दिया गया लेकिन जेल सूपेरिंटेंडेंट, डेप्युटी सूपेरिंटेंडेंट ने कहा कि याकूब बहुत गमगीन था उसने उपमा को टच भी नहीं किया।

वही याकूब के 53वें जन्मदिन के दिन परिवार वालों ने उसके जन्मदिन पर एक केक जेल में भेजा था, लेकिन उसे नहीं मिला। उसने फिर कुरान की आयतें पढ़ीं। करीब 6.10 में उसकी आखिरी याचिका भी सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दी। इसके बाद उसे फां$सी के तख्ते पर लाया गया जहाँ उसने फिर 5 मिनिट तक खड़े होकर कुरान आयतें पड़ी और फिर फां$सी दे दी गई। मेडिकल ऑफिसर ने उसे मृत घोषित किया और शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया।

जेल में इस फां$सी की पूरी प्रक्रिया का विडियो तैयार किया गया। 8 बजकर 40 मिनट पर याकूब का शव उसके परिवार वालों को सौंप दिया गया। इंडिगो फ्लाइट से शव गुरुवार 11 बजे मुंबई पहुंचा। शव के साथ दो पुलिस अधिकारी, एक पुलिस इंस्पेक्टर, एक कॉन्स्टेबल और याकूब के भाई सुलेमान और उस्मान थे। बुधवार को याकूब राष्ट्रपति भवन से उम्मीदें लगा बैठा था।

याकूब अपने परिवार वालों और वकील से लगातार दोहराता रहा कि उसने सरेंडर किया था। वह कहता रहा कि मुझे सीबीआई ने अरेस्ट नहीं किया है, उसे क्यों क्रेडिट दिया जा रहा है। उसने कहा कि रॉ के पूर्व ऑफिसर बी. रमन ने बिल्कुल सच कहा है। इस बात को मेरी याचिका में जोड़ने की जरूरत है।

सुप्रीम कोर्ट के ऑर्डर के बाद सुलेमान और उस्मान ने बुधवार को याकूब से जेल में दोबारा मुलाकात की थी। यह मुलाकात 10 मिनट की थी। इस मुलाकात के दौरान याकूब सच का सामना करने को तैयार नहीं था।

दोनों भाइयों ने याकूब के कहा कि अब सारी उम्मीदें खत्म हो गई हैं लेकिन वह हर बार कहता रहा कि मेरा कोई कसूर नहीं है। वह कहता रहा अब भी विकल्प हैं और न्यायपालिका पर भरोसा है। लेकिन ऐसा नहीं हुआ।