बड़ा फैसला: अब मौलवियों की सेना में होगी भर्ती, दारुल उलूम पहुँचे भारतीय सेना के जनरल मेजर

मेरठ: एशिया के सबसे बड़े दीनी मदरसे और अपनी शिक्षा के लिए दुनियाभर में खास पहचान रखने वाले दारुल उलूम देवबन्द में जल्द ही भारतीय सेना में दारुल उलूम के युवा नजर आएंगे। उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड जोन के भर्ती निदेशालय के एडीजी मेजर जनरल डॉ. सुभाष शरण ने शनिवार को बताया कि सेना में मौलवी डिग्रीधारक युवाओं के लिए धर्म गुरु बनने के लिए रास्ते खुले हैं। मेजर जनरल डॉ. सुभाष शरण ने शनिवार को देवबंद स्थित दारुल उलूम पहुंचकर यह बात कही। दारुल उलूम के 150 साल के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है।

बता दें भारतीय सेना में भर्ती प्रमुख मेजर जनरल सुभाष शरण ने दारुल उलूम पहुँचे जहां मोहतमिम मुफ़्ती अबुल कासिम नोमानी बनारसी से मुलाक़ात हुई। इस दौरान मुफ़्ती अबुल कासिम बनारसी ने मेजर जर्नल का भब्या स्वागत करते हुए उन्हें दारुल उलूम देवबंद की शिक्षा प्रणाली के बारे में तमाम जानकारी दी, इस अवसर पर कई और बड़े सेना के ज़िम्मेदार भी शामिल हुए जिनमें मेरठ ज़ोन के कर्नल कुलदीप भी मौजूद थे जहाँ उनका भी स्वागत किया गया।

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इस मुलाकात के दौरान भारतीय सेना में भर्ती प्रमुख मेजर जनरल की तरफ से दारुल उलूम के मोहतमिम मुफ़्ती अबुल कासिम को सम्मान चिन्ह भेंट किया है। वही मेजर जर्नल सुभाष शरण ने दारूल उलूम के मोहतमिम से कहा कि आपके यहाँ पढ़ने वाले छात्रों को जल्द ही सेना में इमाम और मोअज़्ज़िन की पद पर भर्ती कराया जायेगा।

सेना में इमाम और मोअज़्ज़िन की पद जो कि सेना में बड़े प्रतिष्ठित पद होते हैं, दारूल उलूम के छात्र इस पद पर भर्ती होकर देश और सेना की सेवा कर सकते हैं। इस दौरान एक दिलचस्प घटनाक्रम भी हुआ। दारुल उलूम के मोहतमिम मौलाना अब्दुल कासिम नौमानी ने इस पहल की वजह पूछी, तो एडीजी सुभाष शरण ने बताया कि यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सबका साथ-सबका विकास और सबका विश्वास के आह्वान से प्रेरित है।

सेना के मेजर जर्नल ने दारुल उलूम देवबंद की दुनियाभर में लोकप्रियता की प्रशंसा की और पूछा कि संस्था के 150 वर्षों के इतिहास में कैसे बदलाव आया है। इस सवाल पर, मुफ्ती अबुल कासिम नोमानी ने कहा कि धर्म नहीं बदलता है, लेकिन समाज में बहुत बदलाव आया है।

इस दौरान मेजर जनरल सुभाष शरण ने दारुल उलूम में संस्था के विभिन्न क्षेत्रों का दौरा किया, और प्रसिद्ध मस्जि’द रशीद और दारुल उलूम के पुराने और प्रसिद्ध पुस्तकालयों का विस्तार किया।