सुप्रीम कोर्ट के फैसले से मुस्लि'म पक्षकार खुश नहीं, जफरयाब जिलानी बोले- सुप्रीम कोर्ट के फैसले का सम्मान लेकिन..?

सुप्रीम कोर्ट के फैसले से मुस्लि’म पक्षकार खुश नहीं, जफरयाब जिलानी बोले- सुप्रीम कोर्ट के फैसले का सम्मान लेकिन..?

नई दिल्लीः अयोध्या राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद ऑल इंडिया मुस्लि’म पर्सनल लॉ बोर्ड की तरफ से जफरयाब जिलानी ने सुप्रीम कोर्ट के सम्मान की बात करते हुए कहा कि विवा’दित जमीन को हिंदू पक्षकारों को दिए जाने से खासी निराशा जाहिर करते हुए कहा कि वह सर्वोच्च अदालत के फैसले को पूरा पढ़ने के बाद ही तय करेंगे कि पुनर्विचार याचिका दायर की जाए या नहीं। इसके साथ ही उन्होंने दोनों पक्षों से शांति और सौहार्द्र बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि अदालत ने देश के पंथनिरपेक्ष ताने-बाने को बरकरार रखा है।

सुन्नी वक्फ बोर्ड के वकील जफरयाब जिलानी ने अयोध्या मामले में कहा कि कुछ मसलों पर हमें आपत्ति है, लेकिन पूरा फैसला पढ़ने के बाद ही ही इस बारे में अंतिम तौर पर आगे का रास्ता तय करेंगे. उन्होंने कहा की सवाल 5 एकड़ जमीन का नहीं है। दरअसल, हम मस्जिद किसी को दे नहीं सकते, मस्जिद को हटाया नहीं जा सकता। जिलानी ने कहा है कि हम सुप्रीम कोर्ट के फैसले का सम्मान करते हैं।

बता दें यह देश का सबसे पुराना मामला था और इस मामले में 40 दिनों तक नियमित सुनवाई हुई थी. यह सुप्रीम कोर्ट के इतिहास में अब तक की दूसरी सबसे लंबी चलने वाली सुनवाई थी। कई साल तक चली कानूनी लड़ाई और 40 दिन तक लगातार सुनवाई के बाद आज सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुना दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने विवादित जगह को राम मंदिर बताया। साथ ही कोर्ट ने कहा कि मुस्लि’म पक्ष को मस्जिद बनाने के लिए पांच एकड़ जमीन दी जाएगी।

आपको बता दें सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद जफरयाब जिलानी ने कहा कि जिस संवैधानिक व्यवस्था के तहत विवादित जमीन को लिया गया है, उससे वह संतु’ष्ट नहीं हैं. हालांकि उन्होंने जोर देकर कहा कि फैसला पूरा पढ़ने के बाद ही वह इस बारे में कोई अंतिम निर्णय करेंगे. इसके साथ ही उन्होंने कहा कि सर्वोच्च अदालत ने देश के पंथनिरपेक्ष ढांचे को बरकरार रखते हुए साफ कर दिया है कि यहां हर धर्म बराबर हैं।

वही जफरयाब जिलानी ने कहा 5 एकड़ जमीन मस्जिद दिए जाने की बात हमारी अपेक्षाओं के अनुरूप नहीं है. फिर भी हम अदालत के फैसले का सम्मान करते हैं. गौरतलब है कि सर्वोच्च अदालत के फैसले से पहले वह कहते आए थे कि उन्हें फैसला स्वीकार होगा और वह उसके खिलाफ पुनर्विचार याचिका दाखिल नहीं करेंगे।

आखिर में आज शनिवार को सुप्रीम कोर्ट के पांच जजों की खंडपीठ ने एकमत से फैसला पढ़ना शुरू किया. इसके तहत सर्वोच्च न्यायालय ने अब तक विवा’दित कही जा रही जमीन को केंद्र के हवाले कर तीन महीने के अंदर मंदिर निर्माण के लिए ट्रस्ट बनाने का निर्देश दिया. इसके साथ ही अदालत ने यह भी कहा कि अयोध्या में मस्जिद के लिए महत्वपूर्ण स्थान पर 5 एकड़ जमीन उपलब्ध कराने का आदेश दिया है।

source: #abpnews

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