ज़ायरा वसीम ने अल्लाह और ‘इस्लाम’ के वास्ते फ़िल्मी दुनिया को हमेशा के लिए अलविदा कहा !

आमिर खान के साथ फिल्म दंगल जैसी सुपरहिट फिल्म से दुनिया भर में चर्चित हुई हुई बाल अदाकारा जायरा वसीम ने अब हमेशा के लिए फिल्मी दुनिया को छोड़ दिया है. जायरा वसीम ने अपने फेसबुक प्रोफाइल पर एक लंबी पोस्ट में इस बात का जिक्र किया की अपने इस्लाम धर्म और अल्लाह के लिए यह फैसला ले रही हैं. यह कभी भी फिल्मी दुनिया में कदम नहीं रखेंगे. जायरा वसीम अपने फेसबुक प्रोफाइल पर अंग्रेजी में पोस्ट करती हैं जिसके कुछ खास हिस्से ट्रांसलेट करके हम आपको यहां समझा रहे हैं.

हालांकी ज़ायरा अगर चाहतीं तो अभी उनके आगे एक लम्बी कामयाब ज़िंदगी का सफ़र पड़ा हुआ था, लेकिन अपने मज़बूत और मुक्कमल ईमान के चलते आखिरकार उन्होंने फ़िल्मी दुनिया को हमेशा के लिए अलविदा कह दिया है. नीचे देखें उन्होंने अपने फेसबुक अकाउंट में क्या लिखा है.

ईमान और अल्लाह के रास्ते पर चलने का फैसला किया

जायरा वसीम लिखती हैं 5 साल पहले मैंने एक फैसला किया था, जिससे शायद हमेशा के लिए मेरी दुनिया बदल जाती और मैंने यह फैसला लेते हुए बॉलीवुड में कदम रखा. इसके बाद मैं दुनिया भर में लोगों के बीच काफी फेमस हुई और एक के बाद एक मेरी कामयाबी के रास्ते खुल गए.

इसके बाद मैं लोगों के बीच चर्चा का विषय बनने लगी, यह सब कुछ मुझे अच्छा लगा और मुझे एक कामयाबी की तरह दिखाया गया मुझे अक्सर युवा पीढ़ी के लिए एक रोल मॉडल बताया जाने लगा. हालांकि दिल से मैं कभी नहीं चाहती थी कि मैं ऐसी बनु खासकर नाकाम होना या कामयाब होना मेरे जेहन में ऐसे कोई विचार नहीं थे.

जिनके बारे में मैंने पहचानना और समझना शुरू ही किया था कि कामयाबी क्या होती है अक्सर मैंने चीजों को जानना और समझना शुरू किया और अपनी नई लाइफ़स्टाइल कि जब मुझे समझ हुई तो मुझे एक ऐसा एहसास हुआ कि भले ही मैं यहां पूरी तरह से फिट बैठ रही हूं.

लेकिन मैं वह हूं जो यहां के लिए नहीं बनी हूं हालांकि फिल्मी दुनिया से मुझे बहुत मोहब्बत और सहयोग मिला खूब तारीफें भी बटोरी लेकिन यह मुझे एक तरह से गुमराह कर रहा था. और मुझे पता ही नहीं चला कि कब मैं अपनी मां के रास्ते से बाहर निकल गई बीच में कभी कभी मुझे ऐसा सोचा कि मैं अपने ईमान से डगमगा रही हूं.

लेकिन मैंने जब जब ऐसा ख्याल आया तो उसको नजरअंदाज कर दिया लेकिन कुछ समय से मैंने महसूस किया कि मैंने अपने जीवन में कई सारी बरकत है, खो दी यह एक ऐसा एहसास होता है कि भले ही आप पर रुपया पैसा ना हो और दुनिया भर की खुशी ना हो लेकिन बरकत से आप वंश आत्म संतुष्टि मिलती है.

आप अपनी नजरों में बहुत ऊंचे बने रहते हो मैं मुसलमान भी और इस्लाम धर्म पर चलना मेरा फर्ज है, इस बीच मैंने देखा कि मैं लगातार अपने धर्म से दूर होती जा रही हूं और मैं नहीं चाहती के फेम की चमक में मैं अपने इस्लाम और अल्लाह के बताए हुए रास्ते से भटक जाऊं.

बीच में एक ऐसी स्थिति बनी है कि मुझे कुछ भी समझ नहीं आ रहा था, और ना ही किसी भी बात से संतुष्ट हो पा रही थी सर मैंने महसूस किया कि वाकई में अपने जीवन में मुझसे कहां गलती हो गई है और अब मेरे दिल को सुकून कैसे मिलेगा.

वाकई में मैंने यह फैसला करके अपने आप को आत्म संतुष्टि दी है और अब कुरान और पैगंबर का मार्गदर्शन ही मेरे फैसले लेने और यह तय करने के लिए काफी हैं कि मैं अब पहले वाली जरा नहीं रही मुझे अपने दिल में सुकून महसूस हो रहा है और वह रंग बिरंगी दुनिया मेरे लिए नहीं है और ना पहले थी.